हर कदम पर बदल रहा नाप, हर मोड़ पर ‘तौल’ नदारद
रहली |नगर के गांधी मूर्ति से लेकर कॉलेज तक करोड़ों रुपए की लागत से बन रही सड़क इस समय मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) की प्रयोगशाला बन चुकी है। इस सड़क का डिजाइन और निर्माण कार्य देखकर ऐसा लगता है, मानो विभाग ने शहर के लोगों को गांव की पुरानी पगडंडियों की याद दिलाने के लिए कोई विशेष प्रयोग किया हो। सड़क की चौड़ाई और समतलता का आलम यह है कि यहां हर कदम पर नया नाप देखने को मिल रहा है और हर दस कदम पर इसका ‘तौल’ (संतुलन) बिगड़ा हुआ नजर आता है।

लहरदार सड़क और बाधाओं का अंबार
सड़क को पूरी तरह लहरदार बना दिया गया है, जिससे वाहनों का हिचकोले खाना तय है। सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि मानसून ने दस्तक दे दी है, लेकिन सड़क का काम जगह-जगह अधूरा छोड़ दिया गया है।
सड़क के बीच खंभे: बिना बिजली के खंभों को शिफ्ट किए ही सड़क का निर्माण कर दिया गया है, जो हादसों को खुला निमंत्रण दे रहे हैं।
अनावश्यक घुमाव: पर्याप्त जगह उपलब्ध होने के बावजूद सड़क को सीधा बनाने के बजाय रहस्यमयी ढंग से घुमावदार बना दिया गया है।
जलभराव का मंडरा रहा खतरा
निर्माण कार्य में तालमेल की कमी का खामियाजा स्थानीय निवासियों को भुगतना पड़ेगा। बीएसएनएल की बाउंड्री वॉल न टूटने के कारण एक तरफ की नाली पूरी तरह पैक हो चुकी है। पानी निकासी का कोई रास्ता न होने से अब शुरूआती बारिश में ही पानी शिशु मंदिर और मुख्य सड़क पर जमा होने लगा है।

सरकारी आवास को विशेष रियायत?
सड़क चौड़ीकरण के लिए गुनाकर पार्क के आगे बाउंड्री वॉल तोड़कर नई दीवार बनाई जा रही है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि एक सरकारी आवास के सामने इस बाउंड्री वॉल को अचानक चार फीट आगे बढ़ाकर बनाया जा रहा है। यह हिस्सा पूरी सड़क पर अलग से ही निकला हुआ दिखाई देगा, जो आने वाले समय में यातायात के लिए बड़ी मुसीबत बनेगा। ऐसी दर्जन भर खामियां इस पूरी परियोजना में साफ देखी जा सकती हैं।
जिम्मेदारों का जवाब: तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों का रोना
इस पूरे मामले और अव्यवस्थाओं को लेकर जब एमपीआरडीसी के इंजीनियर मुकुल चौरसिया से बात की गई, तो वे मूल स्थिति और खामियों पर सीधा जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने संक्षेप में सिर्फ इतना कहा:
”तकनीकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जा रहा है। निर्माण कार्य में कुछ प्रशासनिक अड़चनें आ रही हैं, जिनके निराकरण के लिए संबंधित विभाग और प्रशासन को पत्र लिखा गया है।”
अब देखना यह होगा कि करोड़ों की इस सड़क पर हुए इस ‘अनोखे प्रयोग’ को अधिकारी कब तक सुधार पाते हैं, या फिर रहली की जनता को इस आधुनिक पगडंडी पर ही सफर करने को मजबूर होना पड़ेगा।
