कोई कितना ही बड़ा साधु हो,थोड़ी बहुत संसार की चर्चा कर ही लेता हे,लेकिन मप्र की देवरी निवासी रमेश प्रजापति जब भी बोलते हे तो सिर्फ राधा नाम।यह चमत्कार,प्रयास,भक्ति और परिस्थिति का आस्था का अनूठा संगम हे। दरअसल रमेश जन्मजात बोल नहीं पाते,लेकिन इनकी आस्था भगवान में जबरजस्त हे। प्रभात फेरी में जाना शुरू किया,और राधा नाम संकीर्तन में दूसरों को बोलते देख खुद भी प्रयास किया।राधा नाम का चमत्कार हुआ,ईश्वरीय कृपा हुई और सिर्फ और सिर्फ राधा नाम मुंह से निकलने लगा।संभव हे लोग यह कहे कि प्रयास का फल हे तो रमेश ने अन्य शब्दों का भी प्रयास किया लेकिन और कुछ नहीं सीख पाए। सिर्फ राधा नाम हो उच्चारण कर पाना आस्था का चमत्कार ही कहा जाएगा। नीचे वीडियो में देख सकते हे कैसे रमेश उत्साह के साथ राधा नाम बोलते हे।आपकी भी श्रद्धा बढ़ जाएगी।
देखे देवरी से प्रवीण पाठक की खबर
देवरीकलां। भक्ति में शब्दों से ज्यादा भावनाओं का महत्व होता है। जब मन में सच्ची श्रद्धा हो तो कठिन से कठिन परिस्थिति भी भक्ति के रास्ते में बाधा नहीं बन पाती। देवरी में रहने वाले रमेश प्रजापति इसकी ऐसी ही मार्मिक मिसाल हैं, जो हर किसी को भावुक कर देती है।रमेश जी बचपन से ही बोल पाने में असमर्थ हैं। उनकी धर्मपत्नी भी बोल नहीं पाती हैं। इसके बावजूद दोनों जीवन को पूरे उत्साह और सकारात्मकता के साथ जी रहे हैं। रमेश जी देवरी में होने वाले शादी-ब्याह एवं अन्य सामाजिक आयोजनों में कैटरिंग का काम करते हैं और अक्सर लोगों को पानी पिलाते हुए नजर आते हैं। मेहनत-मजदूरी कर अपना जीवन चलाने वाले रमेश जी के चेहरे पर हमेशा संतोष और प्रसन्नता दिखाई देती है।लेकिन उनकी भक्ति का सबसे भावुक कर देने वाला दृश्य तब सामने आता है,जब देवरी में श्री हरि प्रभात फेरी निकलती है और वातावरण में ‘राधा-राधा’ नाम का कीर्तन गूंजता है।रमेश जी भी इस भक्ति में शामिल हो जाते हैं। बोलने में असमर्थ होने के बावजूद वे पूरी ताकत लगाकर ‘राधा’ नाम बोलने का प्रयास करते हैं। आवाज स्पष्ट नहीं निकल पाती, शब्दों को बोलने में कठिनाई होती है,लेकिन उनका प्रयास लगातार जारी रहता है। और फिर कुछ क्षणों के प्रयास के बाद उनके होंठों से धीमी-सी आवाज निकलती है—“राधा… राधा…”
उस क्षण को देखकर वहां मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें नम हो जाती हैं। आवाज भले ही बहुत धीमी और अस्पष्ट हो,लेकिन उस आवाज में छिपी श्रद्धा, प्रेम और आस्था बिल्कुल स्पष्ट नजर आती है।
यह केवल आवाज नहीं,भक्ति की शक्ति है
रमेश जी का ‘राधा’ नाम लेने का प्रयास यह एहसास कराता है कि भगवान के नाम तक पहुंचने के लिए बड़ी-बड़ी बातें या मधुर आवाज जरूरी नहीं होती। जरूरत होती है तो केवल सच्चे भाव की। जहां इंसान की शारीरिक क्षमता जवाब दे जाती है,वहां आस्था और भक्ति उसे आगे बढ़ने की शक्ति देती है।आज जब इंसान सुख-सुविधाओं के बीच भी छोटी-छोटी बातों को लेकर परेशान रहता है,रमेश जी सीमित साधनों में भी जिस उत्साह और प्रसन्नता के साथ जीवन जी रहे हैं, वह समाज के लिए एक बड़ी सीख है।वे हमें सिखाते हैं कि खुश रहने के लिए परिस्थितियों का बेहतर होना जरूरी नहीं,बल्कि मन में संतोष और ईश्वर के प्रति विश्वास होना जरूरी है।रमेश जी के लिए ‘राधा’ सिर्फ एक नाम नहीं,बल्कि उनकी आस्था,उनकी खुशी और उनके जीवन का सहारा बन चुका है। जब श्री हरि प्रभात फेरी में राधा नाम का कीर्तन गूंजता है तो उनका मन भी उसी भक्ति में रम जाता है और वे अपनी पूरी क्षमता से उस नाम को दोहराने का प्रयास करते हैं।उनके होंठों से निकला अस्पष्ट-सा ‘राधा’ शायद यही संदेश देता है कि जहां सच्ची भक्ति होती है,वहां शब्दों की जरूरत नहीं पड़ती—भाव स्वयं भगवान तक पहुंच जाते हैं।रमेश प्रजापति की यह भक्ति और जीवन के प्रति उनका उत्साह हम सभी के लिए प्रेरणा है। ईश्वर उन्हें और उनके परिवार को सदैव स्वस्थ,प्रसन्न और सुखी रखे। राधे-राधे।
