Tuesday, July 14, 2026
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राजनीति के दरिया का,उतरना भी जरूरी था..!

जब इंद्र देवता तक को कुर्सी छिनने के डर से अप्सराएं और वज्र याद आने लगते थे, तो हमारे 'माननीय' किस खेत की मूली हैं!

शाम ढले जब ‘खबरों की दुनिया’ के दफ्तर के बाहर चाय की चुस्कियां ली जा रही थीं, तभी प्यारे मोहन हाथ में अखबार लिए मुस्कुराते हुए दाखिल हुए।
​हम: “कहो प्यारे मोहन! आज चेहरे पर बड़ी रौनक है? कोई खास खबर हाथ लगी क्या?”
​प्यारे मोहन: “अरे संपादक जी, खबर नहीं, असर देख रहा हूँ! कल तक जो नेता जी हवा में तैर रहे थे, आज उनकी ‘दरी’ खिसकती हुई दिखाई दे रही है। मुझे तो लगता है कि राजनीति के चढ़े दरियों के उतरने का दौर शुरू हो चुका है!”

मैने कहा “अरे भाई, राजनीति है, यहाँ चढ़ना-उतरना तो मौसम की तरह है। इसमें इतना हैरान होने की क्या बात है?”
​प्यारे मोहन: (चाय का कुल्हड़ मेज पर रखते हुए) “अरे जी, हैरान वो नहीं हैं जो उतर रहे हैं, हैरान वो हैं जो अब तक सोच रहे थे कि ये दरी हमेशा उन्हीं के नीचे बिछी रहेगी! कल तक जो साहब जनता को देखकर शीशे भी नहीं गिराते थे, आज वो गली-कूचों में हाथ जोड़े ऐसे घूम रहे हैं जैसे कोई खोया हुआ बटुआ ढूंढ रहे हों।”
मैने कहा: “बात तो तुम्हारी पते की है, प्यारे। जब कुर्सी डगमगाती है, तो ज़मीन की याद आ ही जाती है।”
​प्यारे मोहन: “ज़मीन की याद नहीं आती संपादक जी, ज़मीन पर ‘साष्टांग’ करने की नौबत आ जाती है! कल तक जो चमचे और कार्यकर्ता दरी बिछाने के लिए आपस में लट्ठम-लत्ता हो रहे थे, आज वही चमचे नई दरी का नाप लेने निकल गए हैं। राजनीति का वसूल है—’दरी पुरानी हुई नहीं कि बिछाने वाले बदल जाते हैं’।”


​”तो इस बदलते मौसम में जनता का क्या मूड लग रहा है?”बात को समझने के इरादे से सवाल दागा,तो प्यारे मोहन
​(एकदम गंभीर होकर हाथ नचाते हुए) “जनता? जनता तो साहब कोने में बैठकर मूंगफली खा रही है और कह रही है—किस्सा बहुत पुराना है, आज तुम्हारा तो कल हमारा ज़माना है! जो नेता जी कल तक खुद को खुदा समझ रहे थे, आज उन्हें समझ आ रहा है कि जनता सिर्फ वोट नहीं देती, वक्त आने पर अच्छे-अच्छों का ‘अहंकार’ भी उतार देती है।”
​चलते-चलते एक छोटा सा शेर
​जो कल तक अर्श पर थे, आज फर्श का पता पूछते हैं,
दरी क्या खिसकी पैरों से, अब जनता की रज़ा पूछते हैं!

Yogesh Soni Editor
Yogesh Soni Editorhttp://khabaronkiduniya.com
पत्रकारिता मेरे जीवन का एक मिशन है,जो बतौर ए शौक शुरू हुआ लेकिन अब मेरा धर्म और कर्म बन गया है।जनहित की हर बात जिम्मेदारों तक पहुंचाना,दुनिया भर की वह खबरों के अनछुए पहलू आप तक पहुंचाना मूल उद्देश्य है।
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