Wednesday, October 7, 2026
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बुंदेलखंड में गूंजी चीतों की दहाड़, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व बना प्रदेश का तीसरा चीता आवास

लगभग 150 साल बाद फिर लौटे चीते, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में नई शुरुआत

अगले चरण में दो और चीते लाए जाएंगे

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों का नया घर, मुख्यमंत्री ने दो चीते किए रिलीज

चीता, टाइगर और समृद्ध जैव विविधता का संगम बना वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व

‘जियो और जीने दो’ की भावना से वन्यजीव संरक्षण, बुंदेलखंड में चीतों का नया बसेरा

वन्यजीव संरक्षण से पर्यटन, रोजगार और ग्रामीण आजीविका को मिलेगा नया विस्तार – मुख्यमंत्री

सागर 07 अक्टूबर 2026

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज सागर जिले के नौरादेही क्षेत्र स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों को रिलीज करने पहुंचे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए गए सेवा संकल्प अभियान की मध्यप्रदेश के लिए यह महत्वपूर्ण भेंट है। लगभग 150 वर्ष बाद बुंदेलखंड की धरती पर चीतों की वापसी के साथ वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व प्रदेश का तीसरा चीता आवास बना है। यहां चीता, टाइगर सहित समृद्ध जैव विविधता का संगम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘जियो और जीने दो’ की भावना से वन्यजीव संरक्षण को आगे बढ़ाते हुए पर्यटन, रोजगार और ग्रामीण आजीविका के नए अवसरों का विस्तार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वन्यप्राणियों के संरक्षण के साथ वन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों के हितों और उनकी आजीविका की चिंता करना भी सरकार का दायित्व है। वन्यजीव और मानव के बीच संतुलन बनाते हुए ‘जियो और जीने दो’ की भावना के साथ आगे बढ़ना होगा। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीता पुनर्स्थापना के साथ मध्यप्रदेश में अब तीन चीता आवास क्षेत्र हो गए हैं। कूनो और गांधी सागर के बाद यह मध्यप्रदेश का तीसरा चीता आवास क्षेत्र है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 41 वर्ष पूर्व जब इस क्षेत्र को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था, तब यहां के लोगों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों की कठिनाइयों में उनके साथ खड़े होकर सहयोग किया। उन्होंने कहा कि जब हम वन्यप्राणियों की चिंता करते हैं, तब हमारे ग्रामवासियों की चिंता करना भी हमारा दायित्व है। वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय लोगों के हितों के बीच संतुलन बनाकर ही संरक्षण को और मजबूत किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभयारण्यों में पर्यटकों के प्रवेश, जंगल सफारी और अन्य गतिविधियों से होने वाली आय में स्थानीय ग्रामीणों और समितियों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने बताया कि पर्यटकों से प्राप्त राशि में से समितियों को भी उनका हिस्सा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो ग्रामीण अभयारण्य के आसपास अपने गांव और घर आबाद करके रहते हैं, उन्हें भी इसका लाभ मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में बड़े काश्तकार वर्तमान व्यवस्था के दायरे में नहीं आ पा रहे हैं, उन्हें भी लाभ दिलाने के लिए आवश्यक संशोधन किया जाएगा। किसी को भी लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा। बफर क्षेत्र के गांवों में होम स्टे को बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रामीण अपने घरों में एक, दो या तीन कमरे बनाकर पर्यटकों को होम स्टे की सुविधा दे सकते हैं। इसके लिए सरकार द्वारा दो से तीन लाख रुपये तक का अनुदान भी दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन क्षेत्रों में खेती की जमीन सीमित होने के कारण पशुपालन और दूध उत्पादन ग्रामीणों की आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। किसान कल्याण वर्ष में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है। समितियों के माध्यम से किसानों से दूध की खरीदी कर उन्हें उचित मूल्य दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

मध्यप्रदेश में तीसरा चीता आवास क्षेत्र

मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों से पूछा कि कूनो और गांधी सागर की तुलना में वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की क्या विशेषता है। अधिकारियों ने बताया कि कूनो और गांधी सागर में चीता पुनर्स्थापना की गई है, जबकि वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में टाइगर के साथ चीते भी मौजूद होंगे। यह इस क्षेत्र की विशेषता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के अनुसार इस क्षेत्र में लगभग 160 से 170 वर्ष पहले चीते देखे गए थे और अब इतने लंबे अंतराल के बाद यहां फिर चीते लौटे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 में मध्यप्रदेश में चीता पुनर्स्थापना की शुरुआत हुई थी। इसके बाद चीतों की संख्या लगातार बढ़ी है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती वन्यप्राणियों के लिए अनुकूल है। चीता, टाइगर सहित अनेक वन्यजीव यहां सुरक्षित प्राकृतिक आवास प्राप्त कर रहे हैं।

वन्यजीवों के संरक्षण में मध्यप्रदेश अग्रणी

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में टाइगर की संख्या देश में सर्वाधिक है। गिद्ध संरक्षण में भी मध्यप्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका है। कछुओं, चंबल के घड़ियाल और नर्मदा सहित विभिन्न नदियों के जलीय जीवों के संरक्षण की दिशा में भी कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल किसी एक प्रजाति तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे इकोसिस्टम के संरक्षण का विषय है।

उन्होंने कहा कि वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में टाइगर, चीता, नीलगाय, चिंकारा, हिरण सहित अनेक वन्यप्राणी मौजूद हैं। सभी प्रजातियों के बीच प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। चीता शांत और शर्मीला वन्यप्राणी है तथा मानव के साथ इसका संघर्ष सामान्यतः नहीं होता। कूनो में भी प्रारंभिक आशंकाओं के बाद स्थानीय लोगों में चीतों के प्रति अपनापन बढ़ा है।

अगले चरण में दो और चीते लाए जाएंगे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीते छोड़े जा रहे हैं। अगले माह दो और चीते यहां लाए जाएंगे। इससे चीतों का कुनबा बढ़ेगा और यह क्षेत्र उनके लिए स्थायी एवं अनुकूल आवास के रूप में विकसित होगा। मुख्यमंत्री ने वन्यप्राणी सप्ताह के अवसर पर वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, वनरक्षकों और सभी संबंधितों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड की धरती महाराजा छत्रसाल और वीरांगना रानी दुर्गावती की वीरता और गौरव से जुड़ी है। वीरांगना दुर्गावती के नाम पर स्थापित यह टाइगर रिजर्व वन्यजीव संरक्षण के साथ क्षेत्र में पर्यटन, रोजगार और स्थानीय आजीविका के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगा।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि लंबे समय से प्रदेश में चीतों की पुनर्स्थापना की चर्चा होती रही, लेकिन अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विशेष फोकस और प्रयासों से बुंदेलखंड में चीता पुनर्स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की पुनर्स्थापना से बुंदेलखंड के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण पहल के लिए बुंदेलखंड की जनता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति सदैव आभारी रहेगी।

सांसद दमोह श्री राहुल सिंह लोधी ने कहा कि वीरांगना दुर्गावती क्षेत्र में विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि एमएसएमई के माध्यम से भी गतिविधियां संचालित हो रही हैं तथा विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में चीतों की पुनर्स्थापना के बाद पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी। इसके लिए युवाओं को विभिन्न भाषाओं का प्रशिक्षण देने के साथ गाइड प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित किया जाए, ताकि स्थानीय युवा पर्यटकों से संवाद कर सकें और क्षेत्र के पर्यटन स्थलों की जानकारी देने के साथ रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें।

विधायक श्री गोपाल भार्गव ने कहा कि इस क्षेत्र का इतिहास वन संरक्षण के संघर्ष से जुड़ा हुआ है। लगभग 41 वर्ष पहले जब इस क्षेत्र को अभ्यारण्य घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब यहां के ग्रामीण मुख्य रूप से पशुपालन और अन्य पारंपरिक गतिविधियों से अपनी आजीविका चलाते थे। उस समय क्षेत्रवासियों ने जंगल और पर्यावरण के संरक्षण के लिए आंदोलन किया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान में क्षेत्र के विकास के साथ स्थानीय लोगों की आजीविका और रोजगार के अवसर बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से क्षेत्र में बसाहट एवं पुनर्वास, आजीविका से जुड़े कार्यक्रम तथा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का आग्रह किया। श्री भार्गव ने वन विभाग और मध्यप्रदेश पर्यटन के माध्यम से क्षेत्र में पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने युवाओं और बच्चों के लिए अंग्रेजी एवं अन्य भाषाओं के प्रशिक्षण के साथ प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने का आग्रह किया।

Yogesh Soni Editor
Yogesh Soni Editorhttp://khabaronkiduniya.com
पत्रकारिता मेरे जीवन का एक मिशन है,जो बतौर ए शौक शुरू हुआ लेकिन अब मेरा धर्म और कर्म बन गया है।जनहित की हर बात जिम्मेदारों तक पहुंचाना,दुनिया भर की वह खबरों के अनछुए पहलू आप तक पहुंचाना मूल उद्देश्य है।
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