- रहस मेले में की गई सीएम की घोषणा का क्या हुआ? क्या VDTR दौरा सिर्फ वन्यजीवों तक सिमट कर रह जाएग
- “पर्यटन तो ठीक है, पर सिंचाई और नगर में जल सप्लाई का क्या?

खबरों की दुनिया डेस्क/ 7 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (VDTR) आगमन हो रहा है। चीता प्रोजेक्ट के तहत कूनो से लाए गए दो चीतों को बाड़े में छोड़ने के इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर हैं। लेकिन इस हाई-प्रोफाइल दौरे के बीच बुंदेलखंड और क्षेत्र की सबसे बड़ी जरूरत—‘नर्मदा-सुनार लिंक परियोजना’—को लेकर जनता के मन में सवाल तैरने लगे हैं।
क्या मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल वन्यजीव संवर्धन और “जंगली बिल्लियों” की मौजूदगी दर्ज कराने तक सीमित रहेगा, या फिर क्षेत्र की सूखी जमीन को संजीवनी देने वाली नर्मदा-सुनार लिंक परियोजना की फाइलों से धूल हटेगी?
रहस मेले की घोषणा पर ‘सवालिया निशान’
गौरतलब है कि पिछले साल गढ़ाकोटा के ऐतिहासिक रहस मेले के मंच से क्षेत्रीय विधायक और वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव की मांग पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘नर्मदा-सुनार लिंक परियोजना’ को स्वीकृत करने की भव्य घोषणा की थी।
घोषणा के महीनों बीत जाने के बाद भी धरातल पर काम की रफ्तार शून्य नजर आ रही है। मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर अमल न होना अब प्रशासनिक उदासीनता और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर सीधे सवालिया निशान खड़े कर रहा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि चीतों का स्वागत तो ठीक है, लेकिन क्षेत्र के विकास और सिंचाई संकट का स्थाई समाधान नर्मदा-सुनार लिंक ही है।
विधायक भार्गव के प्रयासों से जगी आस
क्षेत्रीय विधायक गोपाल भार्गव लगातार इस परियोजना की स्वीकृति और बजट आवंटन को लेकर प्रयासरत हैं। हाल ही में उनकी जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट से हुई विस्तृत चर्चा को काफी सकारात्मक और सार्थक माना जा रहा है।
संभावना जताई जा रही है कि 7 अक्टूबर को VDTR आगमन के दौरान विधायक भार्गव एक बार फिर मंच या व्यक्तिगत संवाद के जरिए मुख्यमंत्री को रहस मेले में की गई उनकी घोषणा की याद दिलाएंगे। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि वरिष्ठता और जनहित के दबाव के चलते सीएम इस परियोजना को गति देने के लिए कोई ठोस निर्देश या समयावधि तय कर सकते हैं।
