Tuesday, October 6, 2026
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टपरी की चाय, झालमुड़ी और फ्लॉप नौटंकी: प्यारे मोहन का ‘नेताजी जन-संपर्क मॉडल’ पर करारा व्यंग्य!

प्यारे मोहन की चौपाल: इवेंट मैनेजरों की पुरानी स्क्रिप्ट और नेताजी का भारी घाटा!

अबकी बार प्यारे मोहन पूरे ठेठ बुंदेली मिजाज में ज्ञान पेल रए हते

​बोले मुख्यमंत्री जी चाय चाय की टपरी पर चाय पी रये ते,

​अब देखो जू, अपनी बुंदेलखंडी जनता सब समझ गई है। जे नेताजी जब एसी वाली बड़ी गाड़ी से उतर के, सड़क के कड़े पे टपरी पे दो घूंट चाय पीत हैं औ कहते हैं—‘अहा! जे कुल्हड़ की माटी में तो देश की खुशबू है’, तो जनता मनई-मन मुसक्या के केत है—‘हओ-हओ नेताजी! तुम खो कुल्हड़ में माटी की खुशबू आ रई, औ हमका तुम्हारी ई नौटंकी में वोटन की बदबू आ रई!’

​काऊ गरीब के घरे जाके कंडे पे सिकी दो रोटी खा लेबो, रस्ते में भुट्टा चबाबे लग्बो, या भेलपुरी-झालमुड़ी खात-खात फोटो खिंचवा के फेसबुक-व्हाट्सएप पे पेल देबो… अरे दादा! जे टीआरपी (TRP) को इमोशनल कार्ड इतनो पुरानो हो गओ है कि अब तो ढोर-ढंगर भी ई पे ध्यान नईं देत! जनता अब बेवकूफ नईं बनती, बस देख के माथो पटक लेत है।

​पेन ठहरो! ई में अपने सीधे-सादे नेताजी को कौनों कसूर नईं ऐ!

​सब करो-धरो तो उन ‘इवेंट मैनेजरन’ औ ‘सलाहकारन’ को है! लाखन रूपइया महीना छांपबे वाले जे सूट-बूट वाले मैनेजर दिन-रात एक करके का नओ दिमाग लगात हैं?

‘नेताजी! ई बेर हम तुमका एसी से उतार के फटे पट्टा पे बिठारैं! हाथ से झालमुड़ी खइयो, बस फिर देखो… वायरल हो जेहो!’

​अरे राम! जब मैनेजरन को खोपड़ा ई आउटडेटेड चल रो है, तो बेचारे नेताजी नओ आइडिया कहाँ से ले आवें? बे तो लाचार हैं… उई पुरानो घिसो-पिटो माल हर नए गाँव में चिपकावे पे मजबूर हैं। उते मैनेजरन की तिजोरी भर रई, औ इते अपने नेताजी की TRP रसातल में जा रई! नेताजी को तो भयंकर घाटो हो रो, पर मैनेजर सा’ब कह रए—‘सर जी, ई बेर भुट्टा नईं, गन्ने को रस पीत बकत फोटो खिंचइहें… पक्का ट्रेंड कर जैहो!’

​अब तुमी बताओ जू… जब सलाह देबे वाले ई बासी कढ़ी में उबाल लाबे की कोशिश करिहैं, तो जनता ताली बजैहै कि लठिया उठैहै?

​खैर मोरे भइया! नेताजी घाटे में जाएँ चाहे नाफे में… हम तो चले टपरी पे मुफ़्त की ‘राजनीतिक चाय’ छानबे, बिना काऊ कैमरे औ इवेंट मैनेजर के!”

Yogesh Soni Editor
Yogesh Soni Editorhttp://khabaronkiduniya.com
पत्रकारिता मेरे जीवन का एक मिशन है,जो बतौर ए शौक शुरू हुआ लेकिन अब मेरा धर्म और कर्म बन गया है।जनहित की हर बात जिम्मेदारों तक पहुंचाना,दुनिया भर की वह खबरों के अनछुए पहलू आप तक पहुंचाना मूल उद्देश्य है।
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