मप्र।सागर।रहली। दीपावली का मतलब सिर्फ पटाखे और मिठाइयां नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर छिपी कला और सृजनात्मकता को बाहर निकालने का एक बेहतरीन अवसर है। रहली के सांदीपनि विद्यालय में इस बार का दीपोत्सव 2026 कुछ इसी अंदाज में बेहद खास और जुदा रूप में मनाया गया, जहां बच्चों ने अपनी रचनात्मकता से पूरे स्कूल परिसर को रोशन कर दिया।
हुनर का महाकुंभ: उमड़े सैकड़ों प्रतिभागी
विद्यालय में आयोजित प्रतियोगिताओं में बच्चों का उत्साह देखने लायक था। आंकड़े खुद इस बात की गवाही दे रहे हैं कि बच्चों में दीपोत्सव को लेकर कितना क्रेज था:
- दीप सजावट प्रतियोगिता: सबसे ज्यादा 86 छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और एक से बढ़कर एक सुंदर दीये सजाए।
- रंगोली प्रतियोगिता: 37 छात्रों ने रंगों के जादू से फर्श पर मनमोहक आकृतियां उकेरीं।
- निबंध प्रतियोगिता: 37 विद्यार्थियों ने शब्दों के जरिए अपनी सोच और कला को कागज़ पर उतारा।
- चित्रकला प्रतियोगिता: 25 बच्चों ने रंगों के जरिए अपनी कल्पनाओं को जीवंत किया। वहीं, प्री-प्राइमरी के नन्हें-मुन्ने बच्चों ने अपनी मासूम कलाकारी से दीपक की आकर्षक आकृतियां बनाकर सबका दिल जीत लिया।
ये रहे मुकाबले के सितारे (विजेता सूची)
तमाम शानदार प्रस्तुतियों के बीच कड़े मुकाबले में जिन छात्र-छात्राओं ने बाजी मारी, उन्हें विद्यालय के प्राचार्य द्वारा पुरस्कृत किया गया:
- रंगोली: समृद्धि जैन (प्रथम), प्राची पटैल 5th (द्वितीय), मानसी रैकवार (तृतीय)।
- दीप सजावट: सुवर्णा श्रीवास्तव (प्रथम), शैलेन्द्र रैकवार (द्वितीय), सुरभि राठौर व आंचल तिवारी (संयुक्त रूप से तृतीय)।
- चित्रकला: पूनम चढ़ार 5th (प्रथम), आराध्या विश्वकर्मा 3rd (द्वितीय), दिव्या पटैल व पलक भदौरिया (संयुक्त रूप से तृतीय)।
- निबंध: श्यामली दुबे कक्षा 5वीं (प्रथम), प्रियांश सेन (द्वितीय), और सौम्या अहिरवार (कक्षा 2) व ओमती लोधी (संयुक्त रूप से तृतीय)।
सीख और संदेश: टीम वर्क और संस्कृति का पाठ
कार्यक्रम प्रभारी शिक्षक नीरज कुमार नेमा ने रोचक अंदाज में कहा कि ऐसे उत्सव बच्चों को सिर्फ परंपराओं से ही नहीं जोड़ते, बल्कि उन्हें टीम वर्क, आत्मविश्वास और एकजुटता का असल पाठ पढ़ाते हैं। वहीं शिक्षक गोविन्द सिंह ठाकुर ने दीपावली के पांचों दिनों के वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व पर दिलचस्प रोशनी डाली।
विद्यालय के प्राचार्य दिलीप चौबे ने कहा कि इस तरह की रचनात्मक गतिविधियां बच्चों की छिपी प्रतिभा को तराशने का काम करती हैं, जिससे उनमें भारतीय संस्कृति के प्रति गहरा सम्मान पैदा होता है।
इन चेहरों की मेहनत से सफल हुआ आयोजन
इस पूरे उत्सव को शानदार तरीके से संपन्न कराने में निर्णायक की भूमिका राम मनोहर तिवारी, सरोजिनी अग्निहोत्री, आराधना गौर, निशा पटैल, प्रीति मनिहार, प्राची साहू, उमा चौरसिया, अंजना चौरसिया, रेखा साहू, आकांक्षा विश्वकर्मा, शालिनी दुबे, हिमांशु राजपूत, रिमी दीक्षित और अमृता राजन ने निभाई। इसके अलावा देवेंद्र कतरोलिया, शैलेन्द्र जैन, उमेश पाल, नीरज शर्मा, सौरभ पटैल, लक्ष्मी साहू व समस्त सहायिकाओं और विद्यालय परिवार का पूरा सहयोग रहा।
सांदीपनि विद्यालय का यह आयोजन साबित कर गया कि जब बच्चों को सही मंच मिले, तो उनके हुनर का दीया हर तरफ उजाلا बिखेर देता है।
