रहली। दसलक्षण महापर्व की विदाई के साथ रहली नगर में धार्मिक उत्साह एवं भक्तिमय माहौल में अंतिम दिन के कार्यक्रम संपन्न हुए। प्रातः काल अभिषेक और शांतिधारा के बाद मुनिश्री प्रयोग सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में उत्तम क्षमा धर्म की विशेष पूजा-अर्चना की गई।
रजत विमान में निकली भव्य शोभायात्रा
दोपहर दो बजे आदिनाथ जिनालय बजरिया से रजत विमान में श्रीजी को विराजमान कर भव्य शोभायात्रा प्रारंभ की गई। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने घर-घर के सामने आकर्षक रंगोली बनाई और ध्वज वंदन करते हुए श्रीजी की महाआरती उतारी। नगर भ्रमण के उपरांत शोभायात्रा जैन धर्मशाला पहुंची, जहां पुनः अभिषेक कर श्रीजी को मंदिर में विराजमान किया गया। इस अवसर पर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सौरभ हजारी, अक्षय हजारी सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने आरती उतारकर सभी से परस्पर रूप से ‘उत्तम क्षमा’ मांगी।
तपस्वियों व सहयोगियों का हुआ सम्मान
समारोह के दौरान 10 दिनों तक निरंतर पूर्ण उपवास करने वाले श्रावक-श्राविकाओं का बहुमान किया गया। चातुर्मास प्रारंभ से ही निरंतर निर्देशन और पूजन विधान संपन्न करा रहे ब्र. रजनीश भैया, संगीतकार एवं सहयोगी कर्मचारियों का पंचायत अध्यक्ष सुरेश वारमूरी, ट्रस्ट अध्यक्ष राकेश चांदपुर एवं चातुर्मास समिति अध्यक्ष विनीत जैन द्वारा सम्मान किया गया। इसके साथ ही आरती, रंगोली व झांकी सजाओ प्रतियोगिता के विजेताओं तथा समाज मंडली प्रमुख प्रवीण जैन को भी सम्मानित किया गया। सभा में साधु द्वय का पाद प्रच्छालन करने का सौभाग्य अवधेश जैन सपरिवार को प्राप्त हुआ, जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन सुरेंद्र आजाद ने किया।
दी गई जानकारी के आधार पर वेब पोर्टल के लिए तैयार समाचार (न्यूज़ रिपोर्ट), शीर्षक, हुक और हैशटैग नीचे दिए गए हैं:
कैची शीर्षक (Title/Headline):
रहली में दसलक्षण पर्व का समापन: धूमधाम से निकली श्रीजी की शोभायात्रा, मुनिश्री प्रयोग सागर जी ने दिया अंतर्मन से क्षमा का संदेश
हुक (Hook):
भक्ति, समर्पण और उत्तम क्षमा के भाव के साथ रहली में संपन्न हुआ दसलक्षण महापर्व! रजत विमान में नगर भ्रमण पर निकले श्रीजी, तपस्वियों का हुआ भव्य सम्मान।
मुख्य समाचार (Main News Content):
रहली। दसलक्षण महापर्व की विदाई के साथ रहली नगर में धार्मिक उत्साह एवं भक्तिमय माहौल में अंतिम दिन के कार्यक्रम संपन्न हुए। प्रातः काल अभिषेक और शांतिधारा के बाद मुनिश्री प्रयोग सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में उत्तम क्षमा धर्म की विशेष पूजा-अर्चना की गई।
रजत विमान में निकली भव्य शोभायात्रा
दोपहर दो बजे आदिनाथ जिनालय बजरिया से रजत विमान में श्रीजी को विराजमान कर भव्य शोभायात्रा प्रारंभ की गई। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने घर-घर के सामने आकर्षक रंगोली बनाई और ध्वज वंदन करते हुए श्रीजी की महाआरती उतारी। नगर भ्रमण के उपरांत शोभायात्रा जैन धर्मशाला पहुंची, जहां पुनः अभिषेक कर श्रीजी को मंदिर में विराजमान किया गया। इस अवसर पर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सौरभ हजारी, अक्षय हजारी सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने आरती उतारकर सभी से परस्पर रूप से ‘उत्तम क्षमा’ मांगी।
तपस्वियों व सहयोगियों का हुआ सम्मान
समारोह के दौरान 10 दिनों तक निरंतर पूर्ण उपवास करने वाले श्रावक-श्राविकाओं का बहुमान किया गया। चातुर्मास प्रारंभ से ही निरंतर निर्देशन और पूजन विधान संपन्न करा रहे ब्र. रजनीश भैया, संगीतकार एवं सहयोगी कर्मचारियों का पंचायत अध्यक्ष सुरेश वारमूरी, ट्रस्ट अध्यक्ष राकेश चांदपुर एवं चातुर्मास समिति अध्यक्ष विनीत जैन द्वारा सम्मान किया गया। इसके साथ ही आरती, रंगोली व झांकी सजाओ प्रतियोगिता के विजेताओं तथा समाज मंडली प्रमुख प्रवीण जैन को भी सम्मानित किया गया। सभा में साधु द्वय का पाद प्रच्छालन करने का सौभाग्य अवधेश जैन सपरिवार को प्राप्त हुआ, जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन सुरेंद्र आजाद ने किया।
मुनिश्री प्रयोग सागर जी का प्रेरणादायी संदेश
शांति मंत्रों के साथ शांतिधारा के उपरांत देशना देते हुए मुनिश्री प्रयोग सागर जी ने कहा कि वर्ष 2015 में महान आचार्य श्री विद्यासागर जी की उपस्थिति में अतिशय क्षेत्र पटनागंज में बड़े बाबा मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया था। आचार्य श्री समय सागर जी के सानिध्य में स्थल चयन हुआ और निर्यापक मुनि श्री योग सागर जी के सानिध्य में गर्भगृह निर्माण का संकल्पित कार्य आगे बढ़ा। अब समय आ गया है कि कुंडलपुर की तर्ज पर भगवान महावीर स्वामी का मंदिर निर्माण कार्य शीघ्र अति शीघ्र पूर्ण कराया जाए।
मुनिश्री ने क्षमावाणी पर्व का महत्व समझाते हुए कहा कि “क्षमावाणी पर्व केवल पूजा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतर्मन से अपनों के साथ जीवन जीने का नाम है। जिनसे भी जाने-अनजाने कोई भूल हुई हो, उनसे क्षमा मांगनी चाहिए और यदि किसी ने हमारे प्रति कुछ गलत किया हो तो उसे निष्प्रही भाव से क्षमा कर देना चाहिए, तभी क्षमावाणी पूजा सच्ची मानी जाएगी।”
