रहली/सागर । इस वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या पर एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग बनने जा रहा है। आगामी 16 मई, शनिवार को शनि जयंती मनाई जाएगी। वर्षों बाद ऐसा अवसर आया है जब शनि जयंती, शनि अमावस्या और स्वयं शनिवार का त्रिवेणी संगम हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इसे ‘महा-योग’ की संज्ञा दी गई है, जो कर्मों की शुद्धि और शनि दोषों के निवारण के लिए अचूक माना जाता है।
शनि मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान
नगर के प्राचीन शनि मंदिर में इस उत्सव को लेकर तैयारियाँ जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। मंदिर के पुजारी पंडित विनोद शर्मा ने बताया कि शनिवार के दिन अमावस्या और शनि जयंती का मिलना एक महान अवसर है। यह योग विशेष रूप से उन जातकों के लिए फलदायी है जो शनि की साढ़ेसाती या ढैया के प्रभाव से जूझ रहे हैं।
दो दिवसीय कार्यक्रम: अखंड रामायण से भंडारे तक
शनि जयंती के उपलक्ष्य में मंदिर परिसर में भव्य आयोजन किए जाएंगे:
15 मई (शुक्रवार): उत्सव का आगाज़ एक दिन पूर्व अखंड रामायण पाठ के साथ होगा।
16 मई (शनिवार): सुबह रामायण पाठ की पूर्णाहुति होगी। इसके पश्चात भगवान शनिदेव का विशेष अभिषेक, हवन-पूजन और अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।
भजन और भंडारा: शाम को भजन संकीर्तन का आयोजन होगा, जिसके बाद विशाल भंडारे में श्रद्धालु प्रसादी ग्रहण करेंगे।
वट सावित्री व्रत का भी है विशेष महत्व
उल्लेखनीय है कि इसी दिन वट सावित्री व्रत भी मनाया जाएगा। सौभाग्यवती महिलाएँ अपने अखंड सौभाग्य की कामना के लिए बरगद के वृक्ष की पूजा करेंगी। एक ही दिन शनि जयंती और वट सावित्री का होना इस तिथि के धार्मिक महत्व को कई गुना बढ़ा देता है।
पुजारी जी के अनुसार, दुर्लभ ‘महा-संयोग’ पर रहली में सजेगा शनि दरबार: 16 मई को मनेगी शनि जयंती महा-संयोग में किया गया दान-पुण्य और पूजन अक्षय फल प्रदान करता है। मंदिर समिति ने क्षेत्र के समस्त श्रद्धालुओं से इस भव्य धार्मिक आयोजन में सम्मिलित होने की अपील की है।
#शनि जयंती:दुर्लभ ‘महा-संयोग’ पर रहली में सजेगा शनि दरबार: 16 मई को मनेगी शनि जयंती
महा-संयोग में किया गया दान-पुण्य और पूजन अक्षय फल प्रदान करता है।
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