किशनगढ़ के कमलेश ने बुंदेलखंड से दहेज विरोधी ऐसा शंखनाद किया कि गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही हे,,,
अनेक मीडिया संस्थानों ने यह खबर चलाई,, लेकिन इसके पीछे क्या हे असली वजह क्या यह हम आपको बताएंगे,
लोग कहते हैं किस्मत में नहीं था इसलिए नहीं मिला! लेकिन बुंदेलखंड के इस शख्स ने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य पक्का हो, तो आप अपनी किस्मत खुद लिख सकते हैं!
रहली जनपद के सरपंच प्रतिनिधि कमलेश पटेल जिनके आंगन में दो बेटे तो थे, लेकिन बेटी की कमी एक टीस बनकर चुभती थी। पर उन्होंने हार नहीं मानी!
उन्होंने 20 साल इंतज़ार किया। एक अनोखी शपथ ली— कि जब बेटे का विवाह होगा, तो बहू नहीं, बल्कि अपनी ‘बेटी’ को घर लाएंगे। और जब वक्त आया, तो पूरे देश में इसकी गूंज सुनाई दी!
भरे समाज में लाखों का दहेज लौटाते हुए सिर्फ शगुन में 11 रुपए लेने वाले कमलेश ने कहा— “मुझे दौलत नहीं, अपनी बेटी चाहिए।” इसे कहते हैं शंखनाद! एक ऐसी मिसाल जिसने दहेज लोभियों के मुंह पर करारा तमाचा जड़ा है।
याद रखिए— लक्ष्य मत बदलिए, बस दिशा बदलिए। नजरें बदलेंगे तो नजारे खुद-ब-खुद बदल जाएंगे। सलाम है कमलेश पटेल की इस सोच को!
ऐसी ही प्रेरणादायक खबरों के लिए देखते रहिए ‘खबरों की दुनिया’। शेयर करें ताकि यह सोच हर घर तक पहुँचे!
