Wednesday, May 20, 2026
HomeEditer pageखरी खरीक्रूर सिस्टम के आगे लाचार किसान: रहली के चांदपुर में 3 दिन...

क्रूर सिस्टम के आगे लाचार किसान: रहली के चांदपुर में 3 दिन से ‘सर्वर डाउन’, कैंसर के इलाज तक के लिए नहीं मिल रहे खुद के पैसे

कड़ी धूप में चक्कर काटने को मजबूर अन्नदाता

  • दमोह पन्ना बैंक (चांदपुर) की लापरवाही आई सामने
  • मरीजों के परिजनों को ‘सर्वर’ का बहाना बनाकर बैंक से भगाया

रहली/चांदपुर: एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया और बैंकिंग सुविधाओं को सुगम बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत आज भी बेहद दर्दनाक है। रहली विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत चांदपुर स्थित दमोह पन्ना बैंक (सहकारी बैंक) में पिछले 3 दिनों से ‘सर्वर’ न होने के कारण काम पूरी तरह ठप पड़ा है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि किसान इस भीषण और कड़ी धूप में अपने ही खून-पसीने की कमाई निकालने के लिए बैंक के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

कैंसर जैसी घातक बीमारी के इलाज के लिए भी नहीं मिल रहे पैसे

​आज बैंक परिसर में एक बेहद अजीब और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया। ग्राम चांदपुर के किसान हरिकांत कुर्मी को अपने परिवार के सदस्य के कैंसर जैसी घातक बीमारी के इलाज के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी। वे बैंक प्रबंधन के सामने अपने ही पैसे निकालने के लिए मिन्नतें करते रहे, गिड़गिड़ाते रहे। लेकिन संवेदनहीन और क्रूर सिस्टम के नुमाइंदों का दिल नहीं पघला। बैंक प्रबंधन ने ‘सर्वर की समस्या’ का हवाला देते हुए उन्हें साफ मना कर दिया और बैंक से बैरंग लौटा दिया।

​”हमें इलाज के लिए पैसों की तुरंत जरूरत है, लेकिन बैंक वाले कहते हैं कि सर्वर नहीं आ रहा। अगर समय पर इलाज नहीं मिला, तो हमारे मरीज की जान को खतरा हो सकता है। हमारे खुद के पैसे ही हमें मुसीबत में नहीं मिल रहे।”

हरिकांत कुर्मी, पीड़ित किसान

अन्नदाता परेशान, फोन और सर्वर सब ठप

​सिर्फ हरिकांत ही नहीं, बल्कि नरेंद्र गोस्वामी समेत क्षेत्र के सैकड़ों किसान पिछले तीन दिनों से इस भीषण गर्मी में परेशान हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि बैंक का न तो फोन काम कर रहा है और न ही कंप्यूटर का सर्वर आ रहा है। दूर-दराज के गांवों से पैदल और साइकिलों से तपती धूप में आ रहे किसान भूखे-प्यासे बैंक के बाहर बैठने को मजबूर हैं।

जिम्मेदार मौन, जनता में भारी आक्रोश

​इस पूरे मामले में बैंक प्रबंधन का रवैया बेहद निराशाजनक और गैर-जिम्मेदाराना रहा है। आपातकालीन स्थिति (Medical Emergency) में भी ग्राहकों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर कोई तकनीकी खराबी थी, तो उसे 3 दिनों के भीतर ठीक क्यों नहीं किया गया?

​कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के मरीज को इस तरह इलाज के पैसों के लिए तरसाना सिस्टम की क्रूरता को साफ बयां करता है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और बैंक के उच्च अधिकारी जागते हैं या गरीब किसान यूं ही धूप में सिस्टम की मार झेलते रहेंगे।

Yogesh Soni Editor
Yogesh Soni Editorhttp://khabaronkiduniya.com
पत्रकारिता मेरे जीवन का एक मिशन है,जो बतौर ए शौक शुरू हुआ लेकिन अब मेरा धर्म और कर्म बन गया है।जनहित की हर बात जिम्मेदारों तक पहुंचाना,दुनिया भर की वह खबरों के अनछुए पहलू आप तक पहुंचाना मूल उद्देश्य है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular