Wednesday, August 12, 2026
Homeदेशराजनीति के सिक्कों से परे, दुआओं के तराजू में तुली वेदिका: अस्पताल...

राजनीति के सिक्कों से परे, दुआओं के तराजू में तुली वेदिका: अस्पताल से घर वापसी पर ‘देवभूमि’ पर हुई लंबे उम्र के आशीर्वाद की बारिश

तराजू के एक पलड़े पर कोई राजनीतिक कद नहीं, बल्कि ज़िंदगी की जंग जीतकर लौटी एक नन्ही परी बैठी हो... तो वह क्षण महज़ एक परंपरा नहीं रह जाता, वह ममता, आस्था और अखंड विश्वास की अमर कहानी बन जाता है।

अक्सर हमने देखा है कि शक्ति, सत्ता और राजनीति के मंचों पर बड़े-बड़े नेताओं के ‘तुलादान’ होते हैं। नोटों से, मिठाइयों से या अनाज से। लेकिन जब तराजू के एक पलड़े पर कोई राजनीतिक कद नहीं, बल्कि ज़िंदगी की जंग जीतकर लौटी एक नन्ही परी बैठी हो… तो वह क्षण महज़ एक परंपरा नहीं रह जाता, वह ममता, आस्था और अखंड विश्वास की अमर कहानी बन जाता है।

​धड़कनों की मुश्किल जंग: जब थम सी गई थीं घर की खुशियां

योगेश सोनी संपादक

​पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव की नातिन और अभिषेक भार्गव की दुलारी बिटिया, नन्ही वेदिका भार्गव… जिसकी उम्र अभी ठीक से मुस्कुराने और खेलने की है, उसे एक बेहद कठिन पड़ाव से गुजरना पड़ा।

“जिस मासूम ने अभी दुनिया की रंगीनियां देखी भी नहीं थीं, उसे ऑपरेशन थियेटर की ठंडी दीवारों के बीच ज़िंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई लड़नी पड़ी।”

​ फूलों की बारिश से स्वागत: घर लौटी ‘ज़िंदगी’

​कहते हैं कि अगर दुआओं में सच्चा तड़प हो, तो ईश्वर को भी झुकना पड़ता है। वेदिका का सफल ऑपरेशन हुआ और जब वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने आंगन में लौटी, तो पूरे नगर में एक उत्सव छा गया।

  • फूलों की वर्षा: जैसे ही वेदिका की गाड़ी घर की चौखट पर पहुंची, नगरवासियों और परिजनों ने उस पर फूलों की ऐसी बारिश की, मानो आसमान से खुशियों की बौछार हो रही हो।
  • खुशी के आंसू: स्वागत में बिछे हर इंसान की आंखों में एक राहत और बेपनाह मोहब्बत की नमी थी।

​ गणेश मंदिर में ‘अनोखा तुलादान’: जहां चांदी-सोना नहीं, सिर्फ दुआएं तुलीं

​इसके बाद जो हुआ, उसने हर किसी का दिल छू लिया। सिद्ध गणेश मंदिर के प्रांगण में आरती की गूंज और मंत्रों के जाप के बीच नन्ही वेदिका का तुलादान किया गया।

​यह कोई नेताओं वाला औपचारिक तुलादान नहीं था—

  • ​यह एक पिता के समर्पण और दादा के वात्सल्य का तुलादान था।
  • ​तराजू के एक पलड़े पर नन्ही वेदिका मुस्कुरा रही थी, और दूसरे पलड़े पर पूरा नगर उसकी लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की मन्नतें रख रहा था।

​ “बिटिया, तुम युगों-युगों तक मुस्कुराओ”

​गणेश जी के चरणों में माथा टेककर हर हाथ वेदिका के सिर पर आशीर्वाद बनकर उठा। लोगों ने दिल खोलकर नन्ही परी को लंबी उम्र और सेहतमंद ज़िंदगी की दुआएं दीं।

​वेदिका की यह घर वापसी इस बात का सबूत है कि इस दुनिया में ‘प्रेम’ और ‘दुआओं’ से बड़ी कोई ताकत नहीं है। यह नन्ही परी अब सिर्फ अपने भार्गव परिवार का चिराग नहीं, बल्कि पूरे नगर की धड़कन और सब्र की मिसाल बन चुकी है।

Yogesh Soni Editor
Yogesh Soni Editorhttp://khabaronkiduniya.com
पत्रकारिता मेरे जीवन का एक मिशन है,जो बतौर ए शौक शुरू हुआ लेकिन अब मेरा धर्म और कर्म बन गया है।जनहित की हर बात जिम्मेदारों तक पहुंचाना,दुनिया भर की वह खबरों के अनछुए पहलू आप तक पहुंचाना मूल उद्देश्य है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular