रहली । क्षेत्र के खाकी बाबा परिसर में स्थित एक प्राचीन बावड़ी पर खतरा मंडराने लगा है। यह बावड़ी – न केवल जल संचयन का महत्वपूर्ण साधन रही है, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रमुख हिस्सा मानी जाती है।
जानकारी के अनुसार, संबंधित भू-स्वामी द्वारा बावड़ी को समाप्त करने की तैयारी की जा रही है। बावड़ी के चारों ओर टीन शेड लगाकर उसे ढक दिया है, जिससे उसके अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। आशंका जताई जा रही है कि जल्द ही इसे भरकर पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। इससे पहले परिसर में मौजूद कई पुराने पेड़ों को काटकर जमीन को समतल कर दिया, जिससे स्थानीय नागरिकों में आक्रोश है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बावड़ी वर्षों
पुरानी है और इसका निर्माण मराठा शासनकाल में कराया था। नागरिको के अनुसार, इस बावड़ी का निर्माण रानी लक्ष्मी बाई फेयर द्वारा करवाया था और यह पास स्थित विठ्ठल भगवान मंदिर से जुड़ी आस्था का केंद्र भी रही है। यह संरचना उस समय की उन्नत जल संचयन प्रणाली और स्थापत्य
कला का जीवंत उदाहरण है।
गौरतलब है कि प्रदेश में कई प्राचीन बावड़ियों को संरक्षित कर उन्हें विरासत के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रह सकें। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि इतनी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर निजी स्वामित्व में कैसे है और यदि है भी, तो क्या बिना प्रशासनिक अनुमति इसे नष्ट किया जा सकता है।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो यह अमूल्य धरोहर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। लोगों ने बावड़ी को संरक्षित कर इसे पर्यटन और जल संरक्षण के मॉडल के रूप में विकसित करने की भी मांग उठाई है।
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा पुराने जल स्रोतों के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए वर्तमान में “जल गंगा संवर्धन अभियान” चलाया जा रहा है।
इस योजना के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- उद्देश्य: इस अभियान का प्राथमिक लक्ष्य कुएं, बावड़ी, तालाब, नदी और झीलों जैसे पारंपरिक जल स्रोतों की साफ-सफाई करना, उनका गहरीकरण करना और उन्हें अतिक्रमण मुक्त बनाकर पुनर्जीवित करना है।
