रहली के देवलिया मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू! जानिए इस बार क्या रहेगा खास।
रहली/सागर। सनातन हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखने वाला श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस वर्ष अति दुर्लभ और शुभ संयोगों के बीच मनाया जाएगा। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के एक साथ मिलने से इस बार ‘जयंती योग’ का निर्माण हो रहा है, जो पापों का नाश करने वाला और अक्षय पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है।
दुर्लभ ग्रह-नक्षत्रों का बन रहा महासंयोग
4 सितंबर, शुक्रवार को जन्माष्टमी पर जयंती योग के साथ-साथ सर्वार्थ सिद्धि योग, हर्षण योग, वज्र योग और बुधादित्य योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि में, गुरु अपनी स्वयं की राशि में और सूर्य-शुक्र की अनुकूल स्थिति रहेगी। ऐसा महासंयोग कई वर्षों बाद बन रहा है। इस शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीकृष्ण का पूजन-अभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी और कार्यों में सफलता मिलेगी।
तिथि और शुभ मुहूर्त
- अष्टमी तिथि: 3 सितंबर (गुरुवार) रात्रि 2:25 बजे से 4 सितंबर (शुक्रवार) मध्यरात्रि 12:14 बजे तक।
- रोहिणी नक्षत्र: 3 सितंबर रात्रि 12:29 बजे से 4 सितंबर रात्रि 11:04 बजे तक (इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र प्रारंभ)।
- हर्षण योग: 3 सितंबर शाम 6:33 बजे से 4 सितंबर दोपहर 3:43 बजे तक।
मंदिरों में सजेगी झांकी, रखा जाएगा उपवास
जन्माष्टमी पर श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर रात्रि में भगवान का अभिषेक, विशेष श्रृंगार और जागरण करेंगे। घरों व मंदिरों में बाल-गोपाल को वस्त्र-आभूषणों से सजाकर झूला झुलाया जाएगा और विभिन्न लीलाओं की आकर्षक झांकियां सजाई जाएंगी।
रहली के देवलिया मंदिर में भव्य आयोजन
रहली स्थित प्रसिद्ध देवलिया मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव अत्यंत धूमधाम से मनाया जाएगा। मंदिर समिति के अध्यक्ष सुशील हजारी ने बताया कि जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और मंदिर की विशेष साज-सज्जा का कार्य आज से प्रारंभ हो रहा है।
