इतनी पाबंदियों के हालात में बन्दा बिना किसी डर के खुलकर विरोध जता देता हे,यह उतना भाजपा में आसान नहीं हे जितना लोगों ने समझ लिया है,,,
शिवराज चौहान,एक ऐसा नेता जिसकी काट नहीं हे,लोग कुछ भी बोले,हर व्यक्ति में अच्छाई बुराइयां होती हे,लेकिन शिवराज चौहान ने जो काम कर दिया वो इतिहास बन गया,कभी कोई सोच सकता हे भाजपा जैसी पार्टी में वह भी केंद्रीय मंत्री रहते अपनी खुद की सरकार के विरोध में धरने पर बैठ जाए,,अरे दादा भाजपा में हालात यह हे कि अच्छे अच्छे धाकड़,वरिष्ठ नेता भी नाराज हो तो फुसफुसाकर बात करते हे,कही कोई सुन ना ले,,वरना,,,,इतनी पाबंदियों के हालात में बन्दा बिना किसी डर के खुलकर विरोध जता देता हे,यह उतना भाजपा में आसान नहीं हे जितना लोगों ने समझ लिया है,,,

एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते उनका अपनी ही पार्टी की सरकार के स्थानीय प्रशासन के खिलाफ इस तरह सड़क पर उतरना और तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करना अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक संदेश था।
जनता से जुड़ाव: इस कदम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सत्ता के शीर्ष पदों पर रहने के बावजूद वे जनता और अपने पुराने क्षेत्र के लोगों के मुद्दों पर मुखर होने से पीछे नहीं हटते।
भाजपा की कार्यशैली में यह विरोध क्यों है ऐतिहासिक?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा जैसी अनुशासित और केंद्रीय नेतृत्व वाली पार्टी में इस प्रकार का कदम उठाना बेहद कठिन माना जाता है:
- पाबंदियों और अनुशासन का दौर: पार्टी के भीतर अमूमन बड़े से बड़ा वरिष्ठ नेता भी असंतोष की स्थिति में खुलकर बोलने से बचता है या अपनी बात बहुत सावधानी से रखता है। ऐसे माहौल में किसी कद्दावर नेता द्वारा बिना किसी डर के खुलकर विरोध जताना आम बात नहीं है।
- नेतृत्व की स्वतंत्र शैली: शिवराज सिंह चौहान की यह शैली उन्हें अन्य नेताओं से अलग खड़ा करती है। जनता के बीच उनकी ‘मामा’ वाली छवि और ज़मीनी पकड़ ही उनकी वह ताकत है, जिसके कारण वे अपनी बात बेबाकी से रखने का माद्दा रखते हैं।
