आगामी विधानसभा चुनाव में रहली में क्या यही तो नहीं होगा मुद्दा
- विकास के सभी पैमाने पूरे करने के बाद, अब भार्गव ने देश और प्रदेश का ध्यान एक ऐसे महासंकल्प की ओर खींचा है, जो आने वाली कई सदियों और पीढ़ियों का भविष्य तय करेगा।
- दिल्ली जाने वाली ट्रेन के एक शांत कूपे में मध्य प्रदेश की राजनीति का सबसे अनुभवी चेहरा बैठा था, लेकिन उनके दिमाग में क्षेत्र और प्रदेश की जल-सुरक्षा का एक बहुत बड़ा खाका आकार ले रहा था। प्रदेश के पूर्व मंत्री और सबसे वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव के साथ हुई इस exclusive बातचीत में एक ऐसी ‘बड़ी खबर’ निकलकर आई है, जो केवल क्षेत्र ही नहीं, बल्कि प्रदेश स्तर पर जल संरक्षण और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का नया अध्याय लिखने जा रही है।
- [एक्सक्लूसिव साक्षात्कार: ट्रेन सफर के दौरान सीधी बात]
प्रश्न: भार्गव जी, आपने क्षेत्र में विकास के तमाम रिकॉर्ड बनाए हैं। लेकिन दिल्ली सफर के दौरान यह कौन सा बड़ा विजन है, जिस पर आप प्रदेश का ध्यान खींचना चाहते हैं?
- गोपाल भार्गव: देखिए, सीमित संसाधनों के बावजूद हमने क्षेत्र में भौतिक विकास का हर संभव काम पूरा किया है। लेकिन अब समय आ गया है कि हम प्रदेश के समक्ष एक बड़ा उदाहरण प्रस्तुत करें। मानव जीवन केवल सड़कों और इमारतों से पूर्ण नहीं होता, उसे आध्यात्मिक और प्राकृतिक संतुलन चाहिए। मेरा अब एक ही लक्ष्य है—एक ऐसा ऐतिहासिक कार्य, जिसे राष्ट्रीय पहचान मिले और जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे।
- प्रश्न: वह कौन सा महासंकल्प है, जिसे आप जीवन का सबसे बड़ा मिशन बता रहे हैं?
- गोपाल भार्गव: “वह महासंकल्प है—सुनार-नर्मदा लिंक परियोजना’। यह सिर्फ रहली या सागर जिले की मांग नहीं है, यह एक वृहद जल-आध्यात्मिक क्रांति है। नर्मदा जी के पावन जल को सुनार नदी से जोड़कर पूरे अंचल को समृद्ध बनाना मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी अभिलाषा है। इसके लिए कार्ययोजना (DPR) पर बेहद तेजी से काम चल रहा है और इसे प्राथमिकताओं में शामिल कराने के लिए मैं अपनी पूरी ताकत झोंक रहा हूँ।
- प्रश्न: क्या इस विजन को लेकर आपकी शीर्ष नेतृत्व से कोई बात हुई है?
- गोपाल भार्गव: बिल्कुल! मैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस विषय पर दो बार सीधी और गंभीर चर्चा कर चुका हूँ। केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान इस ओर पूरी तरह केंद्रित किया जा रहा है। य और अध्यात्म का यह संगम प्रदेश के लिए मॉडल बनेगा।
- प्रश्न: आप अध्यात्म को विकास से जोड़कर देख रहे हैं, इसके पीछे क्या सोच है?
- गोपाल भार्गव: अध्यात्म ही भारत की असली ताकत है। हमने गढ़ाकोटा में ‘देवी लोक’ का निर्माण कराया, संस्कृत विद्यालय शुरू किया, रानगिर में झूला पुल और टिकिटोरिया में रोपवे जैसे प्रोजेक्ट्स जो निर्माणाधीन हे यह पर्यटन को नई पहचान देंगे। लेकिन सुनार-नर्मदा का मिलन केवल सिंचाई या पर्यटन नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आत्मिक और आध्यात्मिक उन्नति का साधन बनेगा।बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से को प्यास बुझेगी
- प्रश्न: क्षेत्र की जनता को इस महा-परियोजना से क्या उम्मीद रखनी चाहिए?
- गोपाल भार्गव: यह काम ऐसा होगा कि हमारी पीढ़ियां गुजर जाएंगी, लेकिन इसका लाभ सदियों तक मिलता रहेगा। मेरी ओर से इसे जल्द से जल्द धरातल पर उतारने के लिए निर्णायक प्रयास शुरू हो चुके हैं। इस महासंकल्प के सिद्ध होते ही मुझे जीवन में आत्मिक रूप से पूर्ण तृप्ति प्राप्त होगी।”
- क्यों अहम है यह घोषणा?
- गोपाल भार्गव का यह कदम क्षेत्रीय राजनीति से ऊपर उठकर जल-संरक्षण के राष्ट्रीय मिशन से जुड़ता है।
- युगांतकारी परियोजना: ‘सुनार-नर्मदा लिंक’ से बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से की न केवल प्यास बुझेगी, बल्कि आर्थिक और आध्यात्मिक कायाकल्प होगा।
- अंतिम लक्ष्य: राजनीतिक जीवन के सर्वोच्च शिखर पर खड़े भार्गव ने साफ कर दिया है कि अब उनका एकमात्र जीवन-लक्ष्य इस भागीरथ प्रयास को अमलीजामा पहनाना है।
