योगेश सोनी(संपादक)28/8/26
श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह त्योहार भारतीय संस्कृति की उस महान परंपरा को दर्शाता है, जहाँ रिश्तों की डोर धागे से भी अधिक मजबूत होती है। ‘रक्षा’ का अर्थ है सुरक्षा और ‘बंधन’ का अर्थ है धागा या रिश्ता—अर्थात ऐसा बंधन जो रक्षा का वचन देता है।
- पवित्र परंपरा और विधि: इस दिन बहनें सुबह स्नान करके पूजा की थाली सजाती हैं, जिसमें राखी, रोली, अक्षत, दीपक और मिठाई होती है। बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती है, उसकी कलाई पर रेशम की राखी बांधती है और उसकी लंबी उम्र व खुशहाली की कामना करती है। बदले में, भाई अपनी बहन को उपहार देता है और जीवन भर उसकी रक्षा करने का अटूट वचन देता है।
