Thursday, May 21, 2026
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​लोकतंत्र का ‘कच्चा पापड़, पक्का पापड़’ और प्यारे मोहन की ‘वार्ड-परिक्रमा’

देखो प्यारे, अगर सही का नेता बनना है, तो इस 'रील' (Reels) की बीमारी से दूर रहना। कुर्ता पहनकर, चश्मा लगाकर बैकग्राउंड में 'जॉनी-जॉनी हां जी पापा' या 'नायक नहीं खलनायक हूं मैं' वाले गाने पर मटकते हुए रील बनाओगे, तो दो-चार डॉलर भले कमा लोगे, इंस्टाग्राम पर 'रीच' भी मिल जाएगी... पर याद रखना प्यारे, रील से रीच मिलती है, ईवीएम (EVM) में वोट पैदा नहीं होते!"

कल भरी दुपहरी में जब सूरज आग उगल रहा था, तब हमारे परम मित्र प्यारे मोहन हमारे दफ्तर में प्रकट हुए। उनके चेहरे पर वही गंभीरता थी जो आमतौर पर बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री के चेहरे पर होती है। आते ही बोले—”भैया, नगरपालिका चुनाव में ठीक एक साल बचा है। इस बार तय कर लिया है, तुम्हारे भाई को पार्षद का चुनाव लड़ना है। तनिक मार्गदर्शन करो!”

​सवाल इतना भारी था कि बिना कूलर के ही हमें पसीना आ गया। अब परम मित्र को ‘ना’ बोलना यानी अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारना है। हमने सोचा, देश में वैसे भी दो ही चीजें सबसे ज्यादा और बिल्कुल मुफ्त मिलती हैं—एक ‘ज्ञान’ और दूसरी ‘सलाह’। सो, हमने भी मुफ्त की रेवड़ी बांटने में देर नहीं की। बात को तत्काल टालने के लिए हमने गंभीर चेहरा बनाया, चश्मा नाक पर टिकाया और कहा—”प्यारे, एक साल तो बहुत होता है, माहौल बनाने के लिए दो महीने काफी हैं। पर अगर अभी से कसम खा ही ली है, तो राजनीति के ये ‘महामंत्र’ अपनी खोपड़ी में फिट कर लो।”

​मंत्र नंबर 1: रील से रीच मिलेगी, वोट नहीं!

​”देखो प्यारे, अगर सही का नेता बनना है, तो इस ‘रील’ (Reels) की बीमारी से दूर रहना। कुर्ता पहनकर, चश्मा लगाकर बैकग्राउंड में ‘जॉनी-जॉनी हां जी पापा’ या ‘नायक नहीं खलनायक हूं मैं’ वाले गाने पर मटकते हुए रील बनाओगे, तो दो-चार डॉलर भले कमा लोगे, इंस्टाग्राम पर ‘रीच’ भी मिल जाएगी… पर याद रखना प्यारे, रील से रीच मिलती है, ईवीएम (EVM) में वोट पैदा नहीं होते!”

​मंत्र नंबर 2: मुंशी कल्याण योजना

​”गणित समझो प्यारे। एक वार्ड में मुश्किल से हजार-बारह सौ मतदाता होते हैं, यानी करीब 200 घर। रोज सुबह दो घंटे और शाम को तीन घंटे, कुल पांच घंटे का ‘श्रमदान’ करो। पांच घंटे में सिर्फ 10 घरों को निपटाओ—चाय पियो, दुःख-सुख बांटो और परिचय बढ़ाओ। इस हिसाब से 20 से 25 दिन में पूरे वार्ड का कोना-कोना तुम्हारी मुट्ठी में होगा। सबका नाम और मोबाइल नंबर डायरी में नोट कर लेना। हां, सबसे जरूरी बात—अपने साथ एक ‘मुंशी’ जरूर रखना, जो तुम्हारी इस ‘वोटर-कुंडली’ को सहेज कर रख सके। नेता खुद लिखेगा तो चौधरहट कम हो जाएगी!”

​मंत्र नंबर 3: नगरपालिका में ‘विजिटिंग कार्ड’ की आहुति

​”अब सीधे रुख करो नगरपालिका दफ्तर का। वहां बाबू से लेकर बड़े साहब तक, सबको अपना कड़क चमचमाता हुआ विजिटिंग कार्ड थमाओ। सबसे परिचय करो और उनके सरकारी-गैरसरकारी नंबर अपनी डायरी में दर्ज करवाओ। साहब को भी लगना चाहिए कि वार्ड क्रमांक-X से नया संकट पैदा हो चुका है।”

​मंत्र नंबर 4: काम हो या ना हो, अपडेट चालू रहे!

​”दूसरे राउंड में जनता के बीच जाओ और उनकी समस्याएं नोट करो। वार्ड की जनता का एकमात्र काम तो नगरपालिका दफ्तर से ही पड़ता है—कभी नाली, कभी पानी, कभी राशन कार्ड। बस, वहीं से सीधे संबंधित अधिकारी को फोन खड़काओ। अब सुनो असली राजनीति—काम हो या ना हो, हितग्राही को फोन करके अपडेट देते रहो कि ‘अरे मिश्रा जी, आपकी फाइल को कड़कड़ाती धूप में खुद धूप दिखाकर आगे बढ़ाया है।’ जनता काम होने से उतनी खुश नहीं होती, जितनी नेता की दौड़-भाग देखकर गदगद हो जाती है।”

​मंत्र नंबर 5: माला तंत्र और सीएमओ का घेराव

​”तीसरे राउंड में जो काम अटक गए हैं, उनके आवेदन बटोरिए। चार-छह पीड़ितों को साथ लीजिए और सीधे अध्यक्ष महोदय या सीएमओ साहब के बंगले पर धावा बोल दीजिए। पर हां, जाना ‘गांधीवादी’ तरीके से है। पहले साहब को एक बड़ी सी गेंदे के फूलों की माला पहनाकर उनका जोरदार स्वागत करो, कैमरे के लिए पोज दो और फिर मुस्कुराते हुए जनता का काम उनके हाथ में थमा दो। साहब भी माला के वजन तले दबकर कहेंगे—’हां भाई, करते हैं!'”

​⚠️ विशेष सावधानी की चेतावनी:

​”प्यारे, राजनीति में ‘बॉर्डर सिक्योरिटी’ बहुत जरूरी है। सावधानी यह रखनी है कि तुम्हारे पालतू वोटर पर कोई दूसरा नेता आकर अपना ‘ठप्पा’ ना ठोक जाए। अपनी फसल पर नजर रखना तुम्हारा काम है। और हां, जैसे ही काम पूरा हो, सीधे हितग्राही के घर जाकर कागज खुद अपने हाथों से सौंपो, ताकि उसे याद रहे कि नाली साफ हुई है तो उसके पीछे प्यारे मोहन का पसीना बहा है।”

​और बाकी बचे ‘निशाचर’ लोग…

​अब रही बात वार्ड के उन खास लोगों की, जो दिन में तो सोत हैं पर ‘रात के अंधेरे में लोकतंत्र को मजबूत’ करते हैं… जो बोतल की गहराई में देश का भविष्य तलाशते हैं और गांधी छाप कागजों से तौले जाते हैं… तो प्यारे, उनका क्या करना है, यह तुम मुझसे बेहतर जानते हो। इसमें मेरा ज्ञान काम नहीं आएगा, तुम्हारा ‘बजट’ काम आएगा!

​चलते-चलते आखिरी बात गांठ बांध लो—पूरे वार्ड के हर बंदे के मोबाइल में तुम्हारा नंबर ‘सेव’ होना चाहिए। और सुनो, वार्ड में कोई तुम्हें बुलाए या ना बुलाए, चाहे किसी का मुंडन हो, ब्याह हो या तेरहवीं… बिना बुलाए भी वहां पहुंचकर ‘सहयोग’ में खड़े हो जाओ। जब तक लोग सोचें कि ‘यह क्यों आया है’, तब तक तुम उनके घर का आधा काम निपटा चुके हो!

​इतना ‘कोर्स’ पूरा कर लो प्यारे, फिर मिलेंगे अगले सेमेस्टर की कोचिंग के लिए!

​इतना सुनना था कि प्यारे मोहन ने हवा में हाथ लहराया, मानो अभी से मंच पर भाषण दे रहे हों। अब देखना यह है कि सालभर बाद वार्ड में ‘रील’ चलती है या प्यारे मोहन की ‘डील’!

Yogesh Soni Editor
Yogesh Soni Editorhttp://khabaronkiduniya.com
पत्रकारिता मेरे जीवन का एक मिशन है,जो बतौर ए शौक शुरू हुआ लेकिन अब मेरा धर्म और कर्म बन गया है।जनहित की हर बात जिम्मेदारों तक पहुंचाना,दुनिया भर की वह खबरों के अनछुए पहलू आप तक पहुंचाना मूल उद्देश्य है।
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