रहली। आज जब पूरा देश संकटमोचन हनुमान जी की भक्ति में डूबा है, तब रहली नगर के वार्ड क्रमांक 13 से भक्ति और समर्पण की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो हर किसी को प्रेरित कर रही है। यहाँ रहने वाले 87 वर्षीय बुजुर्ग रामजीवन मिश्रा पिछले 14 वर्षों से निरंतर ‘राम नाम’ लेखन की कठिन साधना कर रहे हैं।
किले वाले हनुमान जी के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा को आधार बनाकर श्री मिश्रा अब तक 3 करोड़ 37 लाख 3 हजार 981 बार प्रभु श्री राम का नाम लिख चुके हैं।

एसडीएम रीडर पद से रिटायरमेंट के बाद चुनी भक्ति की राह
राजस्व विभाग में एसडीएम रीडर के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद रामजीवन जी ने अपना शेष जीवन अध्यात्म को समर्पित कर दिया। उन्होंने बताया कि उनकी दिनचर्या की शुरुआत ही प्रभु भक्ति से होती है। वे प्रतिदिन सुबह नित्य क्रियाओं के पश्चात करीब 3 घंटे पूरी एकाग्रता के साथ राम नाम लेखन करते हैं। यह सिलसिला 12 मई 2012 से अनवरत जारी है।
किले वाले हनुमान मंदिर से मिली प्रेरणा
अपनी इस साधना की शुरुआत के बारे में वे बताते हैं कि एक शाम जब वे किले वाले हनुमान मंदिर गए, तो वहां बेदी पर रखी राम नाम लेखन की कॉपियों ने उनका ध्यान खींचा। मंदिर प्रबंधक से चर्चा के बाद वे कॉपियां घर ले आए और वहीं से उनकी यह तपस्या शुरू हो गई। वे विशेष रूप से दिल्ली के एक प्रकाशन से डाक के जरिए कॉपियां मंगाते हैं और पन्ने भर जाने के बाद उन्हें सुरक्षित रखते हैं।

अयोध्या बैंक और नर्मदा में अर्पण
रामजीवन जी इन लिखित कॉपियों को केवल संग्रह मात्र नहीं करते, बल्कि पूर्ण विधि-विधान से पूजन के उपरांत इन्हें अयोध्या स्थित ‘राम नाम बैंक’ में जमा कराते हैं। इसके अलावा कई बार पूर्णिमा के अवसर पर वे बरमान के ब्रह्मघाट में मां नर्मदा की लहरों में भी इन कॉपियों को प्रवाहित करते हैं।
भक्ति से मिलता है आत्मबल
इस उम्र में भी उनकी आंखों की रोशनी और एकाग्रता देखते ही बनती है। श्री मिश्रा का कहना है कि:हनुमान जी के दर्शन और निरंतर राम नाम लिखने से मुझे जो आत्मबल और मानसिक शांति मिलती है, वह शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। प्रभु की कृपा से ही यह साधना आज भी जारी है।
