सांदीपनि स्कूल में सजे 6 अनूठे स्टॉल्स, FLN मेले में दिखा नौनिहालों का ‘स्मार्ट’ टैल
रहली। स्थानीय सांदीपनि विद्यालय के प्राइमरी विंग में बच्चों की रचनात्मकता और सीखने की क्षमता को परखने के लिए एक विशेष ‘गतिविधि आधारित मूल्यांकन’ और ‘FLN मेले’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बालवाटिका (LKG, UKG) से लेकर कक्षा दूसरी तक के नन्हे-मुन्नों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

अभिभावकों की मौजूदगी में हुआ मूल्यांकन
विद्यालय के अरुण (LKG) और प्रभात (UKG) कक्षाओं के कुल 125 दर्ज विद्यार्थियों में से 82 छात्र अपने अभिभावकों के साथ इस प्रक्रिया का हिस्सा बने। खास बात यह रही कि बच्चों का मूल्यांकन पारंपरिक परीक्षाओं के बजाय खेल-खेल में गतिविधियों के माध्यम से किया गया। इसी तरह कक्षा पहली और दूसरी के 101 दर्ज विद्यार्थियों में से 80 छात्र अपने पालकों के साथ FLN मेले में उपस्थित हुए।
6 विशेष स्टॉल्स पर जांची गई प्रतिभा
मेले में बच्चों के सर्वांगीण विकास को मापने के लिए 6 अलग-अलग स्टॉल लगाए गए थे, जहाँ निम्नलिखित कौशलों का आकलन किया गया:
- स्थूल एवं सूक्ष्म गत्यात्मक कौशल: शारीरिक गतिविधियों और बारीकी से काम करने की क्षमता।
- संज्ञानात्मक विकास: तर्क शक्ति और संख्या पूर्व कौशल।
- भाषा विकास: बच्चों की प्रारंभिक साक्षरता और बोलने की कला।
- सामाजिक एवं भावनात्मक विकास: व्यवहार और टीम वर्क।
- रचनात्मकता: बच्चों का सौंदर्य बोध और कलात्मक कौशल।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
कार्यक्रम प्रभारी नीरज नेमा ने बताया कि ECCE (प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा) और FLN (बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान) का मुख्य उद्देश्य बच्चों की व्यक्तिगत प्रगति को समझना है। यह प्रक्रिया शिक्षकों को बच्चों की जरूरतों के हिसाब से एक सुरक्षित और प्रेरक वातावरण तैयार करने में मदद करती है।
प्राचार्य दिलीप चौबे ने शिक्षा में पालकों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शालेय प्रक्रियाओं में अभिभावकों का सहयोग अनिवार्य है। कार्यक्रम के दौरान शिक्षक संजय खरे ने भी उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।
अभिभावकों ने दिया उत्साहजनक फीडबैक
मेले में शामिल हुए अभिभावकों ने विद्यालय की इस पहल की सराहना की। उन्होंने न केवल बच्चों की गतिविधियों को देखा, बल्कि फीडबैक फॉर्म के माध्यम से अपने अनुभव भी साझा किए। इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में रटने के बजाय सीखने की प्रक्रिया पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
