Monday, March 23, 2026
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मप्र:पंचायतों में जंग खा रहा ‘विकास’: करोड़ों के टैंकर बने कबाड़! गांव की फायर बिग्रेड को लगी लापरवाही की आग

सागर/ गर्मी का पारा चढ़ते ही ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का संकट गहराने लगा है। वहीं, मार्च-अप्रैल के महीनों में खेतों में खड़ी सूखी फसलों में आगजनी की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। इन आपात स्थितियों से निपटने के लिए शासन ने ग्राम पंचायतों को ‘फायर ब्रिगेड’ के विकल्प के तौर पर पंप युक्त पानी के टैंकर उपलब्ध कराए थे। लेकिन रहली जनपद में शासन की यह योजना खुद ‘दम तोड़ती’ नजर आ रही है।

​शासन का उद्देश्य था कि दूरदराज के गांवों में आग लगने पर शहर से फायर ब्रिगेड पहुंचने तक का इंतजार न करना पड़े और गांव का अपना टैंकर तत्काल आग पर काबू पा सके। इसके लिए टैंकरों के साथ विशेष पंप भी दिए गए थे। जमीनी हकीकत यह है कि:
​अधिकांश टैंकरों से कीमती पंप नदारद हैं।
​रहली जनपद की 95 ग्राम पंचायतों को दिए गए 246 टैंकरों में से 56 पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं।
​लगभग दो दर्जन टैंकर कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं, जो अब मरम्मत के लायक भी नहीं बचे।
​करीब तीन दर्जन टैंकर छोटे-मोटे सुधार कार्यों के अभाव में धूल फांक रहे हैं और जंग की भेंट चढ़ रहे हैं।

​आंकड़ों में बदहाली

विवरण संख्या
कुल ग्राम पंचायतें 95
कुल आवंटित टैंकर 246
कुल क्षतिग्रस्त टैंकर 56
पूर्णतः अनुपयोगी (कबाड़) 24+

सुधार योग्य/जंग खा रहे 36+

ग्रामीणों का कहना है: “शहर से फायर ब्रिगेड आने में घंटों लग जाते हैं, तब तक फसलें राख हो जाती हैं। पंचायतों के टैंकर अगर सही होते तो लाखों का नुकसान बचाया जा सकता था, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी से ये सिर्फ लोहे का ढांचा बनकर रह गए हैं।”
​अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इन कबाड़ हो रहे टैंकरों की सुध लेकर उन्हें समय रहते कब तक दुरुस्त कराता है

Yogesh Soni Editor
Yogesh Soni Editorhttp://khabaronkiduniya.com
पत्रकारिता मेरे जीवन का एक मिशन है,जो बतौर ए शौक शुरू हुआ लेकिन अब मेरा धर्म और कर्म बन गया है।जनहित की हर बात जिम्मेदारों तक पहुंचाना,दुनिया भर की वह खबरों के अनछुए पहलू आप तक पहुंचाना मूल उद्देश्य है।
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