वृंदावन। कान्हा की नगरी वृंदावन की प्रेममयी भूमि आज एक ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी। देश की प्रथम नागरिक, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राधाकेलि कुंज पहुंचकर सुप्रसिद्ध संत पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन किए और उनसे आध्यात्मिक आशीर्वाद प्राप्त किया।और महाराज जी के प्राकट्य दिवस की शुभकामनाएं दी।

आध्यात्मिक चर्चा और सादगी का संगम
जब ‘राष्ट्रशक्ति’ ने ‘भक्तिशक्ति’ के सम्मुख शीश नवाया, तो समूचा वातावरण ‘राधे-राधे’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। राष्ट्रपति जी ने महाराज जी के सत्संग के कुछ अंश सुने और उनसे जीवन की सार्थकता व लोक कल्याण पर चर्चा की। महाराज जी ने भी राष्ट्रपति को अपनी चिरपरिचित सादगी और वात्सल्य के साथ आशीर्वाद दिया।
केलिकुंज में भक्ति का उल्लास
केलिकुंज की कुंज गलियों में भक्ति का रस कुछ ऐसा बरसा कि सुरक्षा के कड़े पहरों के बीच भी श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। राष्ट्रपति मुर्मू की इस यात्रा ने यह संदेश दिया कि पद की गरिमा चाहे कितनी भी ऊंची हो, भक्ति और प्रेम की भूमि पर हर कोई प्रभु का ही अनन्य भक्त है।
”जहाँ शासन और समर्पण का मिलन हो, वही सच्चा राष्ट्र उत्थान है।”

