Saturday, March 7, 2026
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वृंदावन का गोदा बिहार मंदिर:जहां जैन, सिख, बौद्ध धर्म के गुरुओं की मूर्तियाँ हैं, बल्कि राष्ट्रभक्तों के भी दर्शन होते हैं।

गोदा' नाम दक्षिण भारत की प्रसिद्ध संत अंडाल (गोदांबा) से जुड़ा है, जिन्हें भगवान विष्णु (रंगनाथ) की पत्नी माना जाता है। इसी परंपरा के कारण इसका नाम गोदा विहार पड़ा।

400 से अधिक मूर्तियाँ: मंदिर परिसर के भीतर लगभग 200 से 400 मूर्तियाँ हैं। इनमें भगवान विष्णु के 24 अवतार, चारों युगों का वर्णन, ऋषि-मुनि, और विभिन्न संतों के दर्शन होते हैं।

वृंदावन स्थित श्री धाम गोदा विहार मंदिर (Shri Goda Vihar Mandir) अपनी अनोखी वास्तुकला और धार्मिक शिक्षाओं के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ इस मंदिर के इतिहास और विशेषताओं की जानकारी दी गई है:
मंदिर का इतिहास और महत्व

  • संस्थापक: इस मंदिर की स्थापना स्वामी बलदेव आचार्य महाराज ने की थी। उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण के पंचम स्कंध (5th Chapter) से प्रेरित होकर इस मंदिर की रचना का विचार किया था।
  • नाम का अर्थ: ‘गोदा’ नाम दक्षिण भारत की प्रसिद्ध संत अंडाल (गोदांबा) से जुड़ा है, जिन्हें भगवान विष्णु (रंगनाथ) की पत्नी माना जाता है। इसी परंपरा के कारण इसका नाम गोदा विहार पड़ा।
  • वास्तुकला का उद्देश्य: मंदिर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह स्वर्ग (वैकुंठ) की यात्रा और भगवान लक्ष्मी नारायण के चरणों को प्राप्त करने के विभिन्न चरणों को दर्शाता है।

मुख्य आकर्षण

  • विशाल मूर्तियाँ: यहाँ भगवान लक्ष्मी नारायण की वृंदावन की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में से एक स्थापित है।
  • 400 से अधिक मूर्तियाँ: मंदिर परिसर के भीतर लगभग 200 से 400 मूर्तियाँ हैं। इनमें भगवान विष्णु के 24 अवतार, चारों युगों का वर्णन, ऋषि-मुनि, और विभिन्न संतों के दर्शन होते हैं।
  • विविधता और एकता: यह मंदिर सर्वधर्म सद्भाव का प्रतीक माना जाता है। यहाँ न केवल हिंदू धर्म के विभिन्न संप्रदायों (जैसे जैन, सिख, बौद्ध) के गुरुओं की मूर्तियाँ हैं, बल्कि राष्ट्रभक्तों के भी दर्शन होते हैं।
  • सात लोक: मंदिर में सात लोकों की कल्पना को मूर्तियों के माध्यम से बहुत सुंदर तरीके से दर्शाया गया है।

मंदिर की स्थिति


यह मंदिर वृंदावन के ज्ञान गुदड़ी (Gyan Gudari) क्षेत्र में स्थित है, जो कि प्रसिद्ध रंगजी मंदिर और गोपेश्वर महादेव मंदिर के पास है। भक्तों का मानना है कि यहाँ के दर्शन करने से संपूर्ण हिंदू संस्कृति और वैकुंठ लोक का अनुभव एक साथ हो जाता है।

Yogesh Soni Editor
Yogesh Soni Editorhttp://khabaronkiduniya.com
पत्रकारिता मेरे जीवन का एक मिशन है,जो बतौर ए शौक शुरू हुआ लेकिन अब मेरा धर्म और कर्म बन गया है।जनहित की हर बात जिम्मेदारों तक पहुंचाना,दुनिया भर की वह खबरों के अनछुए पहलू आप तक पहुंचाना मूल उद्देश्य है।
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