पर्यावरण बचाने के लिए कलेक्टर ने पेश किया ‘डिलीशियस’ मॉडल; बिस्कुट के कप और कपड़े के थैलों पर जोर।
दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले से पर्यावरण संरक्षण की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर हर कोई वाह-वाह कर रहा है। कलेक्टर ने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को खत्म करने के लिए एक बेहद दिलचस्प प्रयोग शुरू किया है—’खाए जाने वाले कप’ (Edible Tea Cups)।
स्वाद और स्वच्छता का ‘कॉम्बो’
कलेक्टर ने इस पहल की व्याख्या करते हुए बताया कि अक्सर चाय पीने के बाद लोग प्लास्टिक या कागज़ के कप यहाँ-वहाँ फेंक देते हैं, जिससे गंदगी और प्रदूषण बढ़ता है। लेकिन इस ‘बिस्कुट कप’ के दो फायदे हैं:
- लोगों को चाय के साथ ताजा बिस्कुट खाने को मिलेगा।
- कचरा पैदा ही नहीं होगा, जिससे पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।
पॉलिथीन कल्चर पर प्रहार
खबर के मुताबिक, प्रशासन अब कपड़े के थैलों के इस्तेमाल को एक ‘जन आंदोलन’ बनाने की तैयारी में है। कलेक्टर ने स्पष्ट संदेश दिया है कि प्लास्टिक की थैलियों का कल्चर बंद कर अब हमें पारंपरिक कपड़े के थैलों की ओर लौटना होगा।
“इस तरह के इनिशिएटिव्स को बढ़ावा देना समय की मांग है। हमारा लक्ष्य है कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को अपने जीवन से पूरी तरह समाप्त कर दें।” — कलेक्टर, दमोह
