
बच्चा पैदा करना आसान है,सबसे आसान.. किंतु देश को,समाज को एक श्रेष्ठ नागरिक देना सबके बस की बात नहीं…
कैसा ओजस्वी,धैर्यवान,शांत व्यक्तिव है 19 वर्षीय इस युवा का… महाराष्ट्र के देवव्रत महेश रेखे के विषय में जितनी जानकारी मिलती है उतनी ही हैरान रह जाती हूं…क्योंकि अपने चारों तरफ के परिवेश में तो युवाओं की ऐसी भीड़ दिखती है जिसका न कोई व्यक्तिव है,न चरित्र, न जीवन लक्ष्य न जीवन मूल्य ….और इस भीड़ में सभी जाति के लोग शामिल हैं यहां कोई भेद नहीं! भीड़ हैं इनकी , टाइम पास अफेयर से ,ब्रेकअप, दोस्त की गर्लफ्रेंड या सहेली के ब्वॉयफ्रेंड को पटाकर अपने रूम में बुलाकर मौज मस्ती करने से आगे जिनकी सोच नहीं जाती ….. मैं देखती हूं 20 –21 साल के लड़के –लड़कियों तक में बेहद बचकानापन है…कैसी परवरिश मिली है …न बात करने का आत्मविश्वास, न तहजीब… अभी नाइट क्लब पहुंच जाएंगे…कुछ काम धाम नहीं है तो रोज जिम जाएंगे, घंटों पसीना बहाएंगे…प्रोटीन पाउडर खायेंगे…कोई स्थिरता नहीं,कोई विवेक नहीं, कोई विचारशीलता नहीं..सिर्फ बेचैनी और गुस्सा…दिखावा और कुंठा…
मैं मन से नमन करती हूं ओजस्वी युवा देवव्रत महेश रेखे और उनके माता,पिता, परिवार को ..बच्चा पैदा करना आसान है,सबसे आसान किंतु देश को,समाज को एक श्रेष्ठ नागरिक देना सबके बस की बात नहीं…इनके माता –पिता को बारम्बार नमन है कि उन्होंने अपने प्रतिभाशाली बालक को मीडिया से,दिखावे से बचाकर पाला…उसकी प्रतिभा को निखरने का अवसर दिया,कई माता –पिता अपने एक्स्ट्रा आर्डिनरी बच्चे का बाल्यावस्था से ही इतना प्रचार कर देते हैं कि उसकी प्रतिभा पूरी तरह उभर ही नहीं पाती… महेश रेखे जैसा युवा कभी अवसाद में नहीं जा सकता, कभी किसी से दुर्व्यवहार नहीं कर सकता,कभी भाषिक मर्यादा नहीं लांघ सकता…हो सकता है आने वाले वक्त में महेश किसी बहुत बड़े,जिम्मेदार पद पर हों…वो एक्स्ट्रा आर्डिनरी हैं..गिफ्टेड हैं…उनसे ईर्ष्या मत कीजिए… वो अलग हैं, शायद हम में से कई लोग दण्डक्रम पारायण के विषय में नहीं जानते हों,किंतु जिस विषय को नहीं जानते उसे जाने बिना ही उसकी आलोचना करना निरी मूर्खता है,बल्कि कुंठा है!…हमें गर्व होना चाहिए ऐसे तेजस्वी युवा पर…कोई श्रेष्ठ है,योग्य है,बुद्धिमान हैं तो उसकी श्रेष्ठता को स्वीकारना चाहिए…होते हैं ऐसे विशेष प्रतिभा सम्पन्न बच्चे,जो यदि सम्हाल लिए जाएं तो सर्वश्रेष्ठ युवा साबित होते हैं…भटकाव,बेचैनी, उद्दंड युवाओं की बढ़ती भीड़ में कहीं कुछ तो साकारात्मक दिखा… है तो युवा ही,किसी का बच्चा ही है…,…प्रशंसा कीजिए उत्साहवर्धन कीजिए…. अपना बड़प्पन दिखाइए….
