Saturday, February 21, 2026
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वृंदावन का वह रहस्यमयी मंदिर, जहाँ चैतन्य महाप्रभु के अंगूठे के निशान वाली गोवर्धन शिला मौजूद है”

​श्री राधा गोकुलानंद मंदिर: जहाँ एक ही वेदी पर बसता है वृंदावन का इतिहास

​वृंदावन, जिसे ‘मंदिरों की नगरी’ कहा जाता है, अपने भीतर अनगिनत रहस्य और श्रद्धा समेटे हुए है। यहाँ के “सप्त देवालयों” (सात प्रमुख प्राचीन मंदिरों) में श्री राधा गोकुलानंद मंदिर का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। जहाँ अन्य मंदिरों में प्रायः एक मुख्य युगल सरकार के दर्शन होते हैं, वहीं गोकुलानंद मंदिर एक ऐसा आध्यात्मिक संगम है जहाँ कई महान संतों के प्रिय विग्रह एक ही सिंहासन पर विराजमान हैं।

​1. मंदिर की स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

​इस मंदिर के भव्य स्वरूप का श्रेय महान गौड़ीय आचार्य श्री विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर को जाता है। इतिहास बताता है कि मंदिर के निर्माण से पूर्व, यहाँ के विभिन्न विग्रह अलग-अलग कुटियाओं में सेवित थे। भक्तों की सुविधा और विग्रहों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, श्री विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर ने इस मंदिर का निर्माण कराया और सभी विग्रहों को एक साथ प्रतिष्ठित किया।

​2. एक ही सिंहासन पर विभिन्न विग्रहों का वास

​गोकुलानंद मंदिर की सबसे अनूठी विशेषता इसकी वेदी है। यहाँ के दर्शन मात्र से कई महान संतों की साधना के दर्शन हो जाते हैं:

  • श्री गोकुलानंद: ये मंदिर के मुख्य विग्रह हैं, जिन्हें श्री लोकनाथ गोस्वामी ने अपनी अनन्य साधना से प्रकट किया था।
  • श्री राधा-विनोद: ये भी श्री लोकनाथ गोस्वामी के ही आराध्य देव हैं।
  • श्री राधा-विजय गोविंद: ये महान विद्वान और ‘गोविंदा भाष्य’ के रचयिता श्री बलदेव विद्याभूषण के विग्रह हैं।
  • श्री राधा-गोकुलानंद: ये स्वयं श्री विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर के अपने आराध्य विग्रह हैं।
  • चैतन्य महाप्रभु: यहाँ महाप्रभु का भी एक अत्यंत सुंदर और मनमोहक विग्रह स्थापित है।

​3. चैतन्य महाप्रभु की निशानी: दुर्लभ गोवर्धन शिला

​इस मंदिर की महिमा यहाँ सुरक्षित एक गोवर्धन शिला से और बढ़ जाती है। जनश्रुति और गौड़ीय ग्रंथों के अनुसार, यह शिला स्वयं श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपने प्रिय शिष्य रघुनाथ दास गोस्वामी को उपहार स्वरूप दी थी। इस शिला की विशेषता यह है कि इस पर आज भी महाप्रभु के अंगूठे का निशान अंकित है, जिसे भक्त बड़े चाव से निहारते हैं।

​4. सिद्ध संतों की भजन स्थली और समाधियाँ

​मंदिर परिसर केवल एक देवालय नहीं, बल्कि महापुरुषों की तपस्थली भी है। यहाँ कई प्रमुख संतों की समाधियाँ स्थित हैं, जो इस स्थान को आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनाती हैं:

  • श्री लोकनाथ गोस्वामी की समाधि।
  • श्री नरोत्तम दास ठाकुर की पुष्प समाधि।
  • श्री विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर की समाधि।

​निष्कर्ष: शांति और विद्वता का संगम

​वृंदावन के भीड़भाड़ वाले अन्य मंदिरों की तुलना में गोकुलानंद मंदिर का वातावरण अत्यंत शांत, गंभीर और प्राचीनता का बोध कराने वाला है। यह स्थान गौड़ीय संप्रदाय की विद्वता, त्याग और प्रेम-भक्ति का सजीव प्रमाण है।

विशेष तथ्य: “गोकुलानंद” शब्द का अर्थ है— “वह (श्री कृष्ण), जो संपूर्ण गोकुल को आनंद प्रदान करते हैं।”

Yogesh Soni Editor
Yogesh Soni Editorhttp://khabaronkiduniya.com
पत्रकारिता मेरे जीवन का एक मिशन है,जो बतौर ए शौक शुरू हुआ लेकिन अब मेरा धर्म और कर्म बन गया है।जनहित की हर बात जिम्मेदारों तक पहुंचाना,दुनिया भर की वह खबरों के अनछुए पहलू आप तक पहुंचाना मूल उद्देश्य है।
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