बसंत पंचमी पर राम लला को लगाया गया गुलाल, शुरू हुआ होली
Vrindavan up/ वृंदावन। कान्हा की नगरी में फागुन का रंग चढ़ने लगा है। जगत प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में बसंत पंचमी के पावन पर्व से विधिवत रूप से ‘बसंत उत्सव’ और होली का शुभारंभ हो गया है। मंदिर के पट खुलते ही जब ठाकुर जी ने श्वेत वस्त्रों में दर्शन दिए, तो उनके गालों पर लगा गुलाल देख भक्त निहाल हो उठे।
गोपिकाओं को प्रेम का संदेश
मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन ठाकुर जी गुलाल उड़ाकर अपनी गोपिकाओं और भक्तों को यह संदेश देते हैं कि— “मैं बहुत जल्द रंगों के माध्यम से अपनी कृपा बरसाने आ रहा हूँ।” यह केवल रंग नहीं, बल्कि ठाकुर जी का अपने भक्तों के प्रति प्रेम और वात्सल्य का प्रतीक है।
आज से होलिका दहन तक विशेष सेवा
आज से लेकर होलिका दहन तक मंदिर की चर्या में विशेष बदलाव देखने को मिलेगा:
गुलाल के गुलचे: प्रतिदिन ठाकुर जी के मुखारविंद (मुख मंडल) पर गुलाल के गुलचे धारण कराए जाएंगे।
होली पद गायन: मंदिर के सेवायत गोस्वामी समाज द्वारा परंपरागत रूप से ठाकुर जी के सम्मुख ‘होली पद’ का गायन किया जाएगा।
लाड-चाव: भजनों और पदों के माध्यम से आराध्य के साथ लाड लड़ाने की यह परंपरा सदियों पुरानी है।

अयोध्या: राम लला के दरबार में उड़ा गुलाल, बसंत पंचमी से होली का आगाज़
अयोध्या। राम मंदिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली बार बसंत पंचमी का पर्व बेहद खास रहा। बुधवार को राम लला ने न केवल पीले वस्त्र धारण किए, बल्कि उनके गालों पर अबीर-गुलाल लगाकर होली के उत्सव की शुरुआत की गई। पुजारियों ने भगवान को ‘राग भोग’ अर्पित किया और श्रद्धालुओं के साथ मिलकर होली खेली। इस अवसर पर पूरा मंदिर परिसर ‘भय प्रगट कृपाला’ और होली के गीतों से गुंजायमान रहा। मान्यता है कि अयोध्या में बसंत पंचमी से ही होली का हुड़दंग शुरू हो जाता है, जो अगले 40 दिनों तक चलता है।
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