एक ही पत्थर पर उकेरी सूर्य प्रतिमा और सुनार नदी का तट—अद्भुत है सागर का यह प्राचीन खजाना
बुंदेलखंड का कोणार्क: रहली का वह मंदिर जिसका सीधा संबंध है कर्क रेखा और विज्ञान से
क्या आप जानते हैं? मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक ऐसा मंदिर है जो सीधे ‘कर्क रेखा’ (Tropic of Cancer) पर स्थित है!
9वीं सदी की चंदेल वास्तुकला और सुनार नदी का पावन तट। यहाँ सूर्य देव की पहली किरण सीधे गर्भगृह को आलोकित करती है। जानिए रहली के इस अद्भुत सूर्य मंदिर का गौरवशाली इतिहास और वर्तमान स्थिति।
रहली (सागर, मध्य प्रदेश) का सूर्य मंदिर, बुंदेलखंड का एक प्राचीन और ऐतिहासिक सूर्य मंदिर है, जो सुनार नदी के तट पर स्थित है और कर्क रेखा पर होने के कारण इसका खास धार्मिक महत्व है, जिसे चंदेल राजाओं ने 9वीं सदी में बनवाया था; यह पूर्वाभिमुखी है और सूर्य की पहली किरणें सीधे प्रतिमा पर पड़ती हैं, हालांकि यह वर्तमान में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है और इसके अवशेष देखे जा सकते हैं, जिसमें भगवान सूर्य की एक ही पत्थर पर बनी विशाल प्रतिमा है, जिसे मराठा शासकों ने 18वीं सदी में पुनर्निर्मित कराया था।
मुख्य विशेषताएँ और इतिहास:
स्थान: मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहली नगर में सुनार नदी के किनारे स्थित है।
निर्माण काल: इसका मूल निर्माण 9वीं सदी में चंदेल राजाओं द्वारा किया गया था, और बाद में 18वीं सदी में मराठा शासकों ने इसका जीर्णोद्धार कराया।
कर्क रेखा: यह देश का एकमात्र सूर्य मंदिर है जो कर्क रेखा पर स्थित है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
पूर्वाभिमुखी: मंदिर पूर्व दिशा की ओर है, जिससे सूर्योदय की पहली किरणें सीधे सूर्य देव की प्रतिमा पर पड़ती हैं।
प्रतिमा: मंदिर में एक ही ग्रेनाइट पत्थर पर उकेरी गई भगवान सूर्य देव की विशाल प्रतिमा है, जो सात घोड़ों के रथ पर सवार हैं, साथ में उनकी पत्नियां और भगवान विष्णु भी हैं।
वैज्ञानिक महत्व: माना जाता है कि इन प्राचीन मंदिरों के निर्माण के पीछे विशेष भौगोलिक और वैज्ञानिक कारण थे, जिससे सूर्य की रोशनी का शरीर और चर्म रोगों पर लाभकारी प्रभाव पड़ता था।
वर्तमान स्थिति: मंदिर के कई हिस्से ध्वस्त हो चुके हैं और अवशेष बिखरे पड़े हैं, लेकिन इसकी भव्यता और बारीक नक्काशी अभी भी दिखाई देती है।
नवग्रह प्रतिमा: कभी मंदिर में नवग्रह की प्रतिमा भी थी, जिसे अब डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के पुरातत्व संग्रहालय भेज दिया गया है।
रहली का सूर्य मंदिर बुंदेलखंड की समृद्ध विरासत का प्रतीक है और अपनी ऐतिहासिकता व वास्तुकला के लिए महत्वपूर्ण है, जो श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करता है।
