Saturday, March 21, 2026
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नर्मदा परिक्रमा:अमरकंटक से शुरू हुई मंत्री प्रहलाद पटेल की सुपुत्री प्रतिज्ञा की नर्मदा परिक्रमा,बनाएंगी 7 किमी लंबी पेंटिंग

अमरकंटक से शुरू हुई यह यात्रा केवल एक व्यक्ति की यात्रा नहीं, बल्कि नई पीढ़ी का अपनी संस्कृति और अध्यात्म के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है।

यह दृश्य भारतीय संस्कारों की उस गहराई को दर्शाता है, जहाँ एक रसूखदार राजनेता अपनी संतान को सुख-सुविधाओं के बजाय तप और साधना के मार्ग पर अग्रसर होते देख गर्व महसूस करता है।

प्रतिज्ञा पटेल का लक्ष्य नर्मदा परिक्रमा के दौरान लगभग 7 किलोमीटर (7000 मीटर) लंबी ऑइल पेंटिंग तैयार करना है। यदि वे इसे सफलतापूर्वक पूरा करती हैं, तो यह एक नया विश्व रिकॉर्ड हो सकता है

अमरकंटक। मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी मां नर्मदा के उद्गम स्थल, पवित्र नगरी अमरकंटक से एक ऐसी आध्यात्मिक यात्रा का शुभारंभ हुआ है, जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में है। मध्यप्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल की सुपुत्री प्रतिज्ञा पटेल ने कठिन नर्मदा परिक्रमा का संकल्प लिया है।


सपरिवार पहुंचे पिता, बेटी को दिया आशीर्वाद
इस यात्रा का प्रारंभ बेहद भावुक और आध्यात्मिक रहा। अमरकंटक के पावन तट पर स्वयं मंत्री प्रहलाद पटेल अपनी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मौजूद रहे। एक पिता के रूप में उन्होंने अपनी बेटी के इस साहसी और धार्मिक निर्णय का समर्थन किया।
नर्मदा मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना और कन्या पूजन के बाद, प्रहलाद पटेल ने अपनी बेटी के सिर पर परिक्रमा की ‘पोटली’ रखी। यह दृश्य भारतीय संस्कारों की उस गहराई को दर्शाता है, जहाँ एक रसूखदार राजनेता अपनी संतान को सुख-सुविधाओं के बजाय तप और साधना के मार्ग पर अग्रसर होते देख गर्व महसूस करता है।


वीआईपी चकाचौंध से दूर, एक साधारण परिक्रमावासी
प्रतिज्ञा पटेल की यह यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने किसी भी प्रकार के सरकारी ताम-झाम या सुरक्षा घेरे के बजाय एक सामान्य श्रद्धालु की तरह चलने का निर्णय लिया है।

  • पैदल यात्रा: अमरकंटक की पहाड़ियों से शुरू होकर यह यात्रा हजारों किलोमीटर का सफर पैदल ही तय करेगी।
  • सात्विक जीवन: यात्रा के दौरान वे साधारण वस्त्रों में हैं और नर्मदा तट के आश्रमों में ही विश्राम कर रही हैं।
    विरासत में मिली भक्ति की लौ
    प्रहलाद पटेल खुद नर्मदा मैया के अनन्य भक्त हैं। उन्होंने सालों पहले कठिन नर्मदा परिक्रमा की थी और उस अनुभव को ‘रेवा किनारे-किनारे’ जैसी रचनाओं के माध्यम से साझा भी किया है। आज उनकी बेटी उसी विरासत को आगे बढ़ा रही है। अमरकंटक से शुरू हुई यह यात्रा केवल एक व्यक्ति की यात्रा नहीं, बल्कि नई पीढ़ी का अपनी संस्कृति और अध्यात्म के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है।

  • 7 किलोमीटर लंबी पेंटिंग का संकल्प
  • प्रतिज्ञा पटेल का लक्ष्य नर्मदा परिक्रमा के दौरान लगभग 7 किलोमीटर (7000 मीटर) लंबी ऑइल पेंटिंग तैयार करना है। यदि वे इसे सफलतापूर्वक पूरा करती हैं, तो यह एक नया विश्व रिकॉर्ड हो सकता है। वर्तमान में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में सबसे लंबी पेंटिंग का रिकॉर्ड लगभग 5,300 मीटर का है।
  • पेंटिंग का विषय और रंग
  • चित्रण: वे नर्मदा नदी के दोनों तटों के प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत, घाटों, मंदिरों और आध्यात्मिक दृश्यों को कैनवस पर उतारेंगी।
  • विशेषता: इस पेंटिंग में वे उन स्थानों को भी जीवंत करने का प्रयास करेंगी जो अब नर्मदा के डूब क्षेत्र में आ चुके हैं।
  • प्राकृतिक रंग: पर्यावरण का संदेश देने के लिए वे नेचुरल कलर्स (पत्थरों और वनस्पतियों से बने रंग) का उपयोग कर रही हैं।
  • यात्रा का उद्देश्य
  • स्वच्छता और संरक्षण: उनका मुख्य उद्देश्य लोगों को माँ नर्मदा की स्वच्छता और जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।
  • युवा पीढ़ी को संदेश: वे चाहती हैं कि आज की पीढ़ी अपनी नदियों के आध्यात्मिक और पर्यावरणीय महत्व को समझे।
  • प्रदर्शन: इस विशाल पेंटिंग को भविष्य में बड़े आयोजनों (जैसे सिंहस्थ कुंभ) में प्रदर्शित करने की योजना है ताकि जो लोग परिक्रमा नहीं कर पाए, वे इन दृश्यों का आनंद ले सकें।
  • यात्रा का विवरण
  • यह यात्रा लगभग 2 साल में पूरी होने की उम्मीद है।
  • यात्रा के दौरान पेंटिंग सामग्री और उपकरणों के लिए एक विशेष रूप से तैयार किया गया मिनी ट्रक उनके साथ चल रहा है।
  • वे यह परिक्रमा ‘पांव-पांव’ (पैदल) कर रही हैं और परिक्रमा के सभी कठिन नियमों का पालन कर रही हैं।
    नर्मदे हर!

Yogesh Soni Editor
Yogesh Soni Editorhttp://khabaronkiduniya.com
पत्रकारिता मेरे जीवन का एक मिशन है,जो बतौर ए शौक शुरू हुआ लेकिन अब मेरा धर्म और कर्म बन गया है।जनहित की हर बात जिम्मेदारों तक पहुंचाना,दुनिया भर की वह खबरों के अनछुए पहलू आप तक पहुंचाना मूल उद्देश्य है।
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