
उज्जैन मप्र/ विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में वैसे तो प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि का उत्सव नौ दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन इस वर्ष एक तिथि बढ़ने के कारण इस उत्सव को श्री महाकालेश्वर मंदिर में 10 दिनों तक धूमधाम से मनाया जाएगा, महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व की तैयारी धूमधाम से जारी है, जिसको लेकर मंदिर की रंगाई-पुताई के साथ ही गर्भगृह में रजत के दरवाजों की सफाई के साथ ही दीवारों को भी साफ किया जा रहा है।
आचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व को परंपरागत पर्व के रूप में नौ दिनों तक मनाए जाने की परंपरा है, धार्मिक नगरी उज्जैन बाबा महाकाल, जो की इस नगरी के राजा हैं, इनके साथ ही यहां मां भगवती सती का अंग भी गिरा था, इसीलिए महाशिवरात्रि उत्सव यहां शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है, इस दौरान महाकालेश्वर मंदिर के कोटि तीर्थ पर विराजमान कोटेश्वर महादेव का पूजन-अर्चन किया जाता है, जिसके बाद बाबा महाकाल का अभिषेक, लघु अभिषेक कर नित्य भगवान का श्रृंगार चल प्रतिमाओं के माध्यम से होता है।
ज्योतिषाचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष शिव नवरात्रि उत्सव 10 दिन का तक मनाया जाएगा, मंदिर में शिव नवरात्रि पर वैसे तो बाबा महाकाल 9 दिनों तक अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन देते हैं, लेकिन इस वर्ष 10 दिनों की शिव नवरात्रि उत्सव होने के कारण शिवरात्रि के प्रथम दिन चंदन और वस्त्र से जिस प्रकार बाबा महाकाल का श्रृंगार किया जाएगा, वही श्रृंगार दूसरे दिन भी होगा।
10 दिवसीय पर्व के दौरान यह होगा
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में इस वर्ष शिव नवरात्रि पर्व के 10 दिवसीय आयोजन की शुरुआत 6 फरवरी 2026 से होगी 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि तक भगवान का नौ रूपों में आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा, ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि पर फाल्गुन कृष्ण पंचमी से फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी तक शिव नवरात्र उत्सव मनाया जाता है, इस वर्ष 6 फरवरी फाल्गुन कृष्ण पंचमी के पूजन के साथ शिव नवरात्रि की शुरूआत होगी।
सुबह आठ बजे पुजारी जी कोटितीर्थ कुंड के पास स्थित श्री कोटेश्वर महादेव को अभिषेक-पूजन कर हल्दी चढ़ाएंगे। करीब डेढ़ घंटे पूजन के उपरांत सुबह 9.30 बजे से गर्भगृह में भगवान महाकाल की पूजा होगी, पुजारी भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक कर पूजा-अर्चना करेंगे, इसके बाद 11 ब्राह्मणों द्वारा रुद्रपाठ किया जाएगा, पश्चात दोपहर एक बजे भोग आरती होगी, तीन बजे संध्या पूजा के बाद नौ दिन तक भगवान का अलग-अलग स्वरूपों में श्रृंगार किया जाएगा।
