मप्र/सागर स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से एक दुखद खबर सामने आई है। यहाँ के मोहाली परिक्षेत्र अंतर्गत मानेगांव बीट के कक्ष क्रमांक 159 में एक बाघ मृत अवस्था में पाया गया है।
मामले का संक्षिप्त विवरण
- तारीख और समय: बाघ का शव शाम लगभग 5:30 बजे बरामद हुआ।
- निगरानी: इस बाघ को 18-19 जनवरी 2026 की रात को ही रेडियो कॉलर लगाकर रिजर्व के कोर क्षेत्र में छोड़ा गया था।
- संदेह का कारण: पिछले दो दिनों से बाघ की लोकेशन एक ही स्थान पर स्थिर मिलने के कारण मॉनिटरिंग दल को चिंता हुई। जब टीम ने मौके पर जाकर देखा, तो बाघ मृत पाया गया।

जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट
आज सुबह डॉग स्क्वॉड के माध्यम से घटनास्थल के आसपास सघन तलाशी ली गई। किसी भी प्रकार के जहर की आशंका को खारिज करने के लिए आसपास के जल स्रोतों की लिटमस पेपर से जांच की गई, जिसमें कोई संदिग्ध तत्व नहीं पाया गया।
पोस्टमार्टम के मुख्य बिंदु:
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के प्रोटोकॉल के तहत पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव गुप्ता और स्थानीय पशु चिकित्सक डॉ. नीरज ठाकुर द्वारा पोस्टमार्टम किया गया।
- जांच में पाया गया कि बाघ की खोपड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त थी और हड्डियां टूटी हुई थीं।
- शरीर पर दूसरे बाघ के कैनाइन (दांतों) के गहरे निशान मिले हैं।
विशेषज्ञों का अभिमत
वन संरक्षक श्री रिपुदमन सिंह भदोरिया और NTCA प्रतिनिधि डॉ. प्रशांत देशमुख की उपस्थिति में हुई जांच के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘टेरिटोरियल फाइट’ (क्षेत्र के लिए आपसी लड़ाई) का मामला है। किसी अन्य शक्तिशाली बाघ के साथ हुए संघर्ष में इस बाघ की जान चली गई।
अंत में, विशेषज्ञों और अधिकारियों की उपस्थिति में नियमानुसार बाघ के शव का दाह संस्कार कर दिया गया है।
बाघों के बीच क्षेत्रीय संघर्ष (Territory Struggle) मुख्य रूप से उनके अस्तित्व और वंश को आगे बढ़ाने की जरूरतों से जुड़ा है। एक बाघ के लिए उसका इलाका सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि उसकी ‘लाइफलाइन’ होता है।

बाघों के बीच इस झगड़े के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. भोजन की उपलब्धता (Hunting Ground)
एक बाघ को जीवित रहने के लिए बड़ी मात्रा में शिकार (जैसे हिरण, जंगली सूअर) की आवश्यकता होती है। अगर इलाके में शिकार कम है, तो वह दूसरे बाघ के क्षेत्र में घुसपैठ करता है। अपने भोजन के स्रोत को सुरक्षित रखने के लिए बाघ अपनी सीमाओं की रक्षा जान की बाजी लगाकर करते हैं।
2. प्रजनन के अधिकार (Mating Rights)
नर बाघों के बीच संघर्ष का सबसे बड़ा कारण मादा बाघिनों तक पहुँच बनाना होता है। एक शक्तिशाली नर का इलाका आमतौर पर इतना बड़ा होता है कि उसमें 2 से 3 मादा बाघिनों के क्षेत्र समाहित होते हैं। अन्य नर बाघ इस प्रभुत्व को चुनौती देते हैं ताकि वे अपना वंश आगे बढ़ा सकें।
3. युवा बाघों का बढ़ता दायरा
जब युवा बाघ (लगभग 2 से 2.5 साल के) अपनी माँ को छोड़ते हैं, तो उन्हें खुद का नया इलाका बनाना पड़ता है। इस प्रक्रिया में वे अक्सर पुराने या कमजोर बाघों को चुनौती देते हैं, जिससे भीषण संघर्ष होता है।
4. सीमा निर्धारण (Scent Marking)
बाघ अपने इलाके को मूत्र (Scent marking) और पेड़ों पर पंजों के निशान से चिह्नित करते हैं। जब कोई दूसरा बाघ इन संकेतों को नजरअंदाज कर सीमा पार करता है, तो यह सीधे तौर पर युद्ध का निमंत्रण माना जाता है।
संघर्ष के परिणाम
- गंभीर चोटें या मृत्यु: ये लड़ाईयां अक्सर तब तक चलती हैं जब तक एक पक्ष हार मानकर भाग न जाए या मारा न जाए।
- विस्थापन: हारने वाले बाघ को कम गुणवत्ता वाले क्षेत्र या इंसानी बस्तियों की ओर पलायन करना पड़ता है।
