रहली । नगर में आयोजित भव्य श्री राम कथा के आठवें दिवस पर कथा व्यास भगवतानंद गिरी जी महाराज ने अपने ओजस्वी और मधुर प्रवचन से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
महाराज श्री ने कथा के इस महत्वपूर्ण चरण में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के वन गमन की मार्मिक लीला का वर्णन किया, जिसे सुनकर उपस्थित सभी भक्तों की आँखें नम हो गईं। उन्होंने विस्तार से बताया कि किस प्रकार प्रभु राम ने अपने पिता की आज्ञा और धर्म की रक्षा के लिए राजसी सुखों का त्याग कर कठिन वनवास को स्वीकार किया।
इसके पश्चात, पूज्य महाराज जी ने भगवान राम द्वारा वन में किए गए राक्षसों के संहार की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि प्रभु राम ने किस प्रकार दुष्टों का नाश कर संतों और धर्म की स्थापना की। महाराज श्री ने कहा कि भगवान का अवतार ही धरती पर से पाप और अन्याय को समाप्त करने के लिए होता है।
जीवनोपयोगी उपदेश
कथा के दौरान भगवतानंद गिरी जी महाराज ने श्रोताओं को जीवन में उपयोगी कई महत्वपूर्ण उपदेश भी दिए। उन्होंने कहा कि:
- धर्म और वचन का पालन जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य है, जैसा कि प्रभु राम ने किया।
- सत्य और प्रेम के मार्ग पर चलकर ही मनुष्य जीवन के दुखों से मुक्ति पा सकता है।
- हमें अपने अंदर के ‘राक्षसों’ (जैसे- क्रोध, अहंकार, लोभ) का संहार कर सद्गुणों को अपनाना चाहिए।
महाराज श्री के प्रेरणादायक विचारों और कथा के दिव्य प्रसंगों को सुनकर पंडाल में मौजूद सभी भक्तजन भक्तिमय होकर झूम उठे। कथा के अंत में आरती की गई और प्रसाद वितरण हुआ।
