मप्र/ सागर जिले के ग्राम पटना बुजुर्ग। ग्रामीण अंचल में सामाजिक सुधार की एक नई अलख जगाते हुए, ग्राम पटना बुजुर्ग स्थित श्री देव जानकी गायत्री रमन मंदिर परिसर में एक विशाल नशामुक्ति अभियान का आयोजन किया गया। भगवती मानव कल्याण संगठन के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जाति-पाति के बंधनों से ऊपर उठकर सर्व समाज के सैकड़ों लोगों ने एक स्वर में शराबबंदी का समर्थन किया।
शक्ति स्वरूपा महिलाओं ने संभाली कमान
इस अभियान की सबसे खास बात महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही। घर-परिवार को नशे के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए महिलाओं ने न केवल स्वयं नशामुक्त रहने का संकल्प लिया, बल्कि अन्य परिवारों को भी इस कुरीति से बाहर निकालने का आह्वान किया। महिलाओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि नशा ही अधिकांश घरेलू हिंसा और आर्थिक तंगी की जड़ है।
नारों से गुंजायमान हुआ पूरा गांव
मंदिर परिसर में संकल्प सभा के पश्चात एक भव्य जागरूकता जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर वर्ग के लोग शामिल हुए। ग्राम की गलियों में गूंजते नारों ने जन-मानस को झकझोर कर रख दिया:
- “नशा छोड़ो – जीवन जोड़ो”
- “शराब नहीं, संस्कार चाहिए”
सामाजिक परिवर्तन का आधार: वक्ताओं के मुख्य विचार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने नशे को सामाजिक अभिशाप बताया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु रहे: - स्वास्थ्य और सुरक्षा: शराब व्यक्ति के शरीर के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा को भी खतरे में डालती है।
- आर्थिक सुधार: नशे पर होने वाले खर्च को बचाकर परिवार के भविष्य और बच्चों की शिक्षा पर लगाया जा सकता है।
- आदर्श ग्राम की संकल्पना: पटना बुजुर्ग को एक आदर्श और शांत गांव बनाने के लिए पूर्ण शराबबंदी अनिवार्य है।

“संगठन का उद्देश्य केवल भाषण देना नहीं, बल्कि धरातल पर मानव जीवन को संस्कारवान और नशामुक्त बनाना है। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुधार की किरण न पहुँच जाए।”
— सुनील पटेल,राजेश सेन सदस्य, भगवती मानव कल्याण संगठन
एकजुटता के साथ समापन
कार्यक्रम के समापन पर ग्रामवासियों ने सामूहिक रूप से हाथ उठाकर आजीवन नशे से दूर रहने का संकल्प लिया। ग्रामीणों ने संगठन के प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास दिलाया कि वे पटना बुजुर्ग को नशामुक्त घोषित करवाने में हर संभव सहयोग करेंगे।
