मप्र । रहली में चल रही श्री राम कथा में कथा व्यास महामंडलेश्वर भगवतानंद जी महाराज ने श्री राम जी के विवाह के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब जनक जी की निराशा भरी वाणी सुनकर लक्ष्मण जी को क्रोध आया और जैसे ही वे अपने आसन से उठे, धरती डोलने लगी और दिग्गज कांपने लगे। लक्ष्मण जी ने जनक जी को संबोधित करते हुए कहा कि यह जीर्ण शीर्ण धनुष तो क्या है, मैं पूरे ब्रह्मांड को भी उठाकर पटक सकता हूं।
इसके बाद, राम जी ने लक्ष्मण जी को प्रेम पूर्वक बुलाकर आसन पर बैठाया। बाजू में ही बैठे विश्वामित्र मुनि ने धनुष भंग होने का समय शुभ जानकर राम जी से कहा, “राम जी उठो और धनुष उठाकर जनक जी के दुख को दूर कर प्रतिज्ञा पूरी करवाओ।”
गुरु आज्ञा सुनकर भगवान श्री राम उठे तो तुलसी बाबा ने लिखा है कि “सहज ही चले सकल जग स्वामी।” भगवान राम को देखकर सभी राजा मोहित हो गए और राम जी ने पलक झपकते ही धनुष को उठाकर तोड़ दिया। चारों ओर जय जयकार हुई और धनुष टूटते ही जनक जी की आज्ञा से सीता जी ने आकर वरमाला श्री राम जी के गले में पहनाई।
# राष्ट्र और धर्म के लिए आगे बढ़ें, मंजिल मिलकर रहेगी
कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कथा व्यास ने कहा कि जब राम जी धनुष तोड़ने जाने लगे तो वहां बैठे 10,000 राजाओं में बातचीत होने लगी कि फूलों से बालक कैसे धनुष उठाएंगे।
कथा व्यास ने श्रोताओं से कहा कि राष्ट्र, समाज, धर्म और स्वयं के कल्याण के लिए भगवान से जुड़कर आगे बढ़ो। लोग तो कुछ ना कुछ बोलेंगे ही, उन्हें बोलने दो, तुम अपना काम करते चलो। उन्होंने विश्वास दिलाया कि एक दिन मंजिल मिलकर रहेगी, रास्ते में विचलित नहीं होना है। एक दिन ऐसा आएगा कि यही ताने मारने वाले लोग आपका सम्मान करेंगे।
सनातन की एकजुटता का संदेश: सुरक्षा के लिए तलवार भी उठा सकते हैं
भगवतानंद जी महाराज ने कहा कि विधर्मी लोगों के द्वारा की जा रही घटनाओं के कारण ही देश में सनातन धर्म को संगठित करने के लिए यात्राएं निकल रही हैं, ताकि विधर्मी लोगों को पता चल सके कि यदि एक संत के कहने से लाखों लोग पदयात्रा में शामिल हो सकते हैं, तो यह अपनी और देश की सुरक्षा के लिए तलवार भी उठा सकते हैं।
कथा विश्राम पर भव्य आरती संपन्न हुई। इस अवसर पर भाजपा नेता अभिषेक भार्गव, गढ़ाकोटा नगर पालिका अध्यक्ष मनोज तिवारी, राजेंद्र जारोलिया, सुरेश राठौड़, राजकुमार ठाकुर, विवेक शुक्ला, गुड्डन मासाब सहित हजारों लोग रामायण का श्रवण करने पहुंचे।
