रहली। स्थानीय बाड़े में आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिवस भगवान राम का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान भक्तों ने भगवान के जन्म की खुशी में बधाई गीत गाए और जमकर नृत्य किया, जिसमें बधाई नृत्य मुख्य आकर्षण रहा। पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
व्यासपीठ से महामंडलेश्वर भगवतानंद जी महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचन में मातृशक्ति की महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा कि “हमारी बेटियों ने विश्व कप जीतकर देश का नाम रोशन किया है।”
महाराज श्री ने इस बात पर जोर दिया कि अनादिकाल से मातृशक्ति की महिमा गाई जा रही है और माता की शक्ति इतनी प्रबल है कि वह “नारायण को भी पत्थर बना सकती है।

महामंडलेश्वर जी ने इस अवसर पर भगवान शालिग्राम और तुलसी जी के महत्व को विस्तार से बताया। उन्होंने श्रद्धालुओं से उनके विवाह उत्सव को धूमधाम से मनाने का अनुरोध किया।
उन्होंने बताया, “आज भी बिना तुलसीदल के भगवान भोग स्वीकार नहीं करते हैं।” तुलसी दल का महत्व बताते हुए उन्होंने इसे भगवान की पूजा में अनिवार्य बताया।
महाराज श्री ने भगवान के विभिन्न अवतारों की कथा सुनाते हुए उनके अवतार लेने के कारणों और महत्व को समझाया।
इसके उपरांत उन्होंने भगवान राम के जन्म की कथा सुनाई और बताया कि विप्र (ब्राह्मण), धेनु (गाय), देवता, और संत के हित के लिए भगवान पृथ्वी पर जन्म लेते हैं। इस मंगलमयी कथा को सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो उठे।
समग्र रूप से, श्रीराम कथा का यह तीसरा दिवस धार्मिक उत्साह, बधाई नृत्य और ज्ञानवर्धक प्रवचनों से भरा रहा, जिसने सभी श्रद्धालुओं को भक्ति के रंग में रंग दिया।
