सागर, मप्र। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के सागर आगमन ने जिले की स्थानीय राजनीति में एक दिलचस्प तस्वीर पेश की। उनके स्वागत मंच पर जिले के तीन कद्दावर नेता – मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, विधायक भूपेंद्र सिंह और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव एक साथ दिखे। हालांकि, यह सियासी जमावड़ा, जिसे पार्टी की एकजुटता के रूप में देखा जाना चाहिए, अंदरूनी राजनीतिक खींचतान की पृष्ठभूमि में और भी महत्वपूर्ण हो गया।

सूत्रों के अनुसार, भूपेंद्र सिंह और गोविंद सिंह राजपूत के बीच पिछले कुछ समय से पुरानी अदावत चल रही है, जिसने उनके समर्थकों के बीच भी विरोध और तनातनी का माहौल बना दिया था। जमीन से जुड़े मामलों और राजनीतिक वर्चस्व को लेकर दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी और सियासी टकराव अक्सर सामने आते रहे हैं।
मतभेद पर एकता का ‘कवर’: एक साथ आने का राजनीतिक मायने
सबसे खास बात यह रही कि जहां गोविंद सिंह और भूपेंद्र सिंह के रिश्ते तल्ख माने जा रहे थे, वहीं वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव दोनों ही नेताओं के साथ अपने सहज और मधुर संबंध बनाए हुए हैं।
खंडेलवाल के स्वागत मंच पर इन तीनों नेताओं की मौजूदगी को सियासी गलियारों में कई तरह से देखा जा रहा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ भूपेंद्र सिंह भी मंत्री गोविंद सिंह के निवास पहुंचे।

- संगठन का दबाव: यह स्पष्ट है कि नए प्रदेश अध्यक्ष के सामने आपसी मतभेद प्रदर्शित न हो, इसके लिए संगठन ने सख्त संदेश दिया होगा, जिसके चलते विरोध को दरकिनार कर सभी नेता एक मंच पर आए।
- भार्गव की भूमिका: गोपाल भार्गव ने संभवतः एक सेतु (Bridge) की भूमिका निभाई, जिससे इन दो विरोधी ध्रुवों को एक साथ लाया जा सका। उनकी उपस्थिति ने मंच पर एक संतुलन बनाए रखा।
- समर्थकों को संदेश: नेताओं का एक साथ आना उनके समर्थकों के बीच पनप रहे अंदरूनी विरोध को ठंडा करने का प्रयास भी हो सकता है, ताकि पार्टी की छवि चुनावी माहौल में खराब न हो।
तस्वीर जो बहुत कुछ कहती है
खंडेलवाल के स्वागत की इस सामूहिक तस्वीर ने यह तो साफ कर दिया कि सागर भाजपा में भले ही नेताओं के निजी संबंध और महत्वाकांक्षाएं टकरा रही हों, लेकिन जब बात संगठन और शीर्ष नेतृत्व की आती है, तो सभी मतभेदों को भुलाकर ‘एकजुट’ दिखना पार्टी की मजबूरी भी है और रणनीति भी।
यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मंच पर दिखाई गई एकता क्या जमीनी स्तर पर भी कायम रहेगी, या फिर प्रदेश अध्यक्ष के जाते ही यह सियासी अदावत फिर से सतह पर आ जाएगी। सागर जिले की राजनीति में यह ‘टेंपरेरी यूनिटी’ आने वाले दिनों में क्या मोड़ लेती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी प्यारे….. - किसी शायर ने ठीक कहा हे,,,,,
- ये दोस्ती नहीं, ख़ास मक़सद की जुस्तजू है,
जहाँ तक राह एक है, हमसफ़र बने रहेंगे
