Wednesday, February 4, 2026
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MP:सागर कमिश्नर का कड़ा रुख: “नल कनेक्शन से लें सैंपल, लापरवाही मिली तो खैर नहीं”

जिन क्षेत्रों में जलजनित बीमारियां यथा उल्टी-दस्त, हैजा आदि की बीमारी फैली हो, का चिन्हाकन किया जाए तथा इन क्षेत्रों में जलजनित बीमारियों के फैलने के कारणों तथा उन कारणों को दूर करने हेतु की गई कार्यवाही को सूचीबद्ध किया जाए। उक्त क्षेत्रों के अलावा ऐसे क्षेत्रों (नालों/नाली को क्रॉस कर बिछाई गई पाईपलाईन का क्षेत्र, ऐसा क्षेत्र जिसमें पाईपलाईन पुरानी होने के कारण पाईपलाईन में टूट-फूट की अधिक शिकायतें प्राप्त होती है आदि) का भी चिन्हाकन कर सूचीबद्ध किया जाए

उपभोक्ता के नल कनेक्शन से सैंपल लेकर जांच कराए, सभी जिलों में कंट्रोल रूम स्थापित करें, नगरी एवं ग्रामीण क्षेत्र की नल जल योजनाओं की लगातार मॉनिटरिंग करें, ट्रीटमेंट प्लांट में ब्लीचिंग एवं क्लोरीन का प्रयोग लगातार करें -संभाग कमिश्नर श्री सुचारी

कमिश्नर सागर संभाग श्री अनिल सुचारी ने पेयजल वितरण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए संभाग के समस्त जिलों के कलेक्टरों को नल जल प्रदाय योजनाओं से प्रदाय किये जाने वाले पेयजल की गुणवत्ता की मॉनिटरिंग एवं जलजनित बीमारियों के रोकथाम हेतु निर्देश देते हुए कहा कि उपभोक्ता के नल कनेक्शन से सैंपल लेकर जांच कराए, सभी जिलों में कंट्रोल रूम स्थापित करें, नगरी एवं ग्रामीण क्षेत्र की नल जल योजनाओं की लगातार मॉनिटरिंग करें, ट्रीटमेंट प्लांट में ब्लीचिंग एवं क्लोरीन का प्रयोग लगातार करें एवं  कुओं एवं नलकूपों में क्लोरीन एवं ब्लीचिंग पाउडर का छिंड़काव नियमित रूप से करें।

बैठक में कमिश्नर सागर संभाग श्री अनिल सुचारी ने स्पष्ट एवं कड़े निर्देश दिए कि  पूर्व में जिन क्षेत्रों में जलजनित बीमारियां यथा उल्टी-दस्त, हैजा आदि की बीमारी फैली हो, का चिन्हाकन किया जाए तथा इन क्षेत्रों में जलजनित बीमारियों के फैलने के कारणों तथा उन कारणों को दूर करने हेतु की गई कार्यवाही को सूचीबद्ध किया जाए। उक्त क्षेत्रों के अलावा ऐसे क्षेत्रों (नालों/नाली को क्रॉस कर बिछाई गई पाईपलाईन का क्षेत्र, ऐसा क्षेत्र जिसमें पाईपलाईन पुरानी होने के कारण पाईपलाईन में टूट-फूट की अधिक शिकायतें प्राप्त होती है आदि) का भी चिन्हाकन कर सूचीबद्ध किया जाए जहां जलजनित बीमारियों की फैलने की आशंका हो। इन क्षेत्रों में जल जनित बीमारियों की रोकथाम हेतु प्राथमिकता पर आवश्यक कार्यवाही की जाए। शहर/नगरों एवं गांवों में पेयजल योजना से प्रदाय किये जाने वाले जल की गुणवत्ता के खराब होने के संबंध में प्राप्त शिकायतों, उन शिकायतों के निराकरण हेतु की गई कार्यवाही एवं पेयजल की गुणवत्ता खराब होने के जो कारण संज्ञान में आते है उन कारणों को भी सूचीबद्ध किया जाए तथा ऐसे कारणों को दूर करने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाये ।

बैठक में कमिश्नर सागर संभाग श्री अनिल सुचारी ने कहा कि पेयजल प्रदाय योजना की राईजिंग मेन में एवं जल वितरण नलिकाओं में स्थापित वॉल्वस/वॉल्स चैंबर के क्षतिग्रस्त होने पर इनका सुधार कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए ताकि क्षतिग्रस्त वॉल्व / वॉल्व चैम्बर से प्रदाय किए जाने वाले पेयजल की गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव ना पडे। सतही जल स्त्रोतो पर आधारित योजनाओं के जल शोधन संयंत्र पर संचालित जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में जल की गुणवत्ता का परीक्षण दैनिक रूप से नियमानुसार कराया जाना सुनिश्चित किया जाए तथा परीक्षण में पाए जाने वाले परिणामों को संधारित किया जाए। परिणामों में यदि जल की गुणवत्ता प्रभावित पाई जाती है तो जल की गुणवत्ता के सुधार हेतु आवश्यक ठोस कदम तुरंत उठाए जाएं। जल शोधन संयंत्र से शोधित जल का परीक्षण, क्रॉस परीक्षण के तौर पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की संचालित एन.ए.बी.एल जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में कराया जाए। क्रिटिकल क्षेत्र के घरेलू नल कनेक्शनों के जल में रेसीडुअल क्लोरीन की मात्रा का सघन परीक्षण कराया जाए।

बैठक में कमिश्नर सागर संभाग श्री अनिल सुचारी ने कहा कि पेयजल की गुणवत्ता के विभिन्न पैरामीटर्स की विस्तृत जानकारी तथा विभिन्न तत्वों की अधिकता से होने वाली बीमारियों की विस्तृत जानकारी हेतु नगरीय/ग्रामीण निकायों के पेयजल कार्य से संबंधित अधिकारियों / कर्मचारियों का प्रशिक्षण लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री / सहायक यंत्री / रसायनज्ञ से कराया जाए। जल शोधन संयंत्र के विभिन्न घटकों, उच्च स्तरीय टंकियों, सम्पवेल एवं नलकूप स्त्रोत होने की स्थिति में नलकूप के आसपास साफ सफाई का विशेष ध्यान दिया जाए। नगरीय/ग्रामीण निकायों की जल प्रदाय व्यवस्था का आकस्मिक निरीक्षण किया जाए। जल शोधन संयंत्रों में उपयोग में लाए जाने वाले केमिकल्स की गुणवत्ता निर्धारित मापदंड की हो तथा आवश्यक केमिकल्स पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित किया जाए। उपभोक्ताओं में इस बात का प्रचार प्रसार किया जाए कि पाइपलाइन में लीकेज होने, वॉल्व /फीटिंग्स के क्षतिग्रस्त होने या ऐसे कारक जिनके कारण पेयजल की गुणवत्ता प्रभावित होती है, की जानकारी प्राप्त होने पर नगरीय/ग्रामीण निकायों के अधिकारियों को इसकी सूचना दी जाए। उपभोक्ताओं को इस बात की भी समझाइश दी जाए कि वह घरेलू कनेक्शन के पाइपों को खुला ना छोड़ें। जिन नगरीय/ग्रामीण निकायों में सीवर लाइनें हैं उनके संधारण पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि सीवेज से पेयजल की गुणवत्ता खराब ना हो।

Yogesh Soni Editor
Yogesh Soni Editorhttp://khabaronkiduniya.com
पत्रकारिता मेरे जीवन का एक मिशन है,जो बतौर ए शौक शुरू हुआ लेकिन अब मेरा धर्म और कर्म बन गया है।जनहित की हर बात जिम्मेदारों तक पहुंचाना,दुनिया भर की वह खबरों के अनछुए पहलू आप तक पहुंचाना मूल उद्देश्य है।
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