(सागर से विपिन दुबे 9300739610)
मप्र/”श्याम” के चरणों में श्रद्धा; भक्ति; समर्पण की वह एकादशी महाव्रत की रात भक्त वृंद कभी नहीं भूल पाएंगे जब गगन भेदी जयकारों और पुष्प बरसा के साथ “गोपाल” के ब्रज उत्सव सत्संग में आने का सौभाग्य मिला। जी हां… जीवन को धन्य करने वाली वह रात थी सागर के श्री देव गोपाल लाल जी मंदिर की वर्षगांठ और “ब्रज उत्सव” की। कान्हा के लिए अपना सारा जीवन समर्पण करने वाले गृहस्थ संत श्री राम जी यादव (काका जी) ने इस मंदिर की नींव साल 1965 में रखी थी।
हर साल 27 फरवरी को यह उत्सव वृंदावन की तर्ज पर श्री देव गोपाल लाल जी मंदिर परिसर में मनाया जाता है। इस बार वृंदावन से आए कलाकारों ने करीब 15 क्विंटल फूल से फूल बंगला सजाया और जिसने भी देखा निहारता रहा।

मंदिर की वर्षगांठ के एक दिन पहले 26 फरवरी को श्री देव गोपाल लाल जी का अभिषेक के साथ अन्य धार्मिक पूजन क्रियाएं की गई। 27 फरवरी को हजारों भक्तों को उस पल का इंतजार था जब गोगोपाल कान्हा के दर्शन हो जाएं।
सूरज ढलते ही मंदिर परिसर में श्रद्धा और आस्था का संगम फूट पड़ा। अष्ट सखी झांकियां के साथ कृष्ण और राधा की सजीव झांकी सजाई गई। गृहस्थ संत राम जी यादव के साथ कदम से कदम मिलाने वाले परम पूजनीय आराध्य श्री राधारमन दास जी महाराज (दंडी स्वामी) ने अष्ट सखियों का पूजन किया। भक्तों ने उन्हें गोद में उठाकर नृत्य किया।
- श्रद्धा और आस्था का ऐसा संगम की सर से नख तक बस गए “राधे”
श्री देव गोपाल लाल जी मंदिर के राधे-राधे कीर्तन मंडल के “गोपाल कृष्ण बंधु” कृष्ण हरी और मनु यादव द्वारा जब पहली प्रस्तुति करके “इशारों बुलाई गई रे… बरसाने की छोरी” से शुरुआत हुई तो मानो कान्हा की भक्ति में सभी के कदम नाचने के लिए बहकने लगे। मनमोहन मधुसूदन कृष्ण कन्हैया की भक्ति में तन मन बेसुध होकर किसी की आंख से प्रेम भक्ति के आंसू छलकने लगे तो कोई आंख बंद करके ऐसा लीन हो गया मानो कृष्ण के परम साक्षात दर्शन कर रहा हो। “तू ना संभाले तो मुझे कौन संभाले”….. कान्हा बरसाने में आ जइयो बुलाई गई राधा रानी… हमसे पर्दा करो ना मुरारी… सरगम की धुन पर जैसे भक्ति पद गूंजे तो श्री देव गोपाल लाल जी मंदिर का ब्रज उत्सव वृंदावन बन गया। श्वेत वस्त्र में एक ऐसी कान्हा की सखी आई जिसे सभी का मन मोह लिया।
गोधूलि की बेला से शुरू हुआ कार्यक्रम आधी रात तक चला। जब कान्हा और राधा की सजीव झांकी ने अपनी प्रस्तुति दी तो हर शख्स वाह… वाह कर उस झलक को कमरे में कैद करने के लिए बेताब हो गया। रात 12:00 बजे हजारों भक्तों की मौजूदगी में बांके बिहारी सरकार की आरती से महोत्सव का समापन हुआ। इस महाउत्सव का संचालन राधे-राधे मंडल के सदस्य पत्रकार विपिन दुबे एवं जस्सी सरदार ने किया। श्री देव गोपाल लाल की पोशाक और अन्नकूट सेवा केशवगंज वार्ड निवासी योगेश गुप्ता एवं उनके पुत्र प्रशांत गुप्ता की ओर से भेंट की गई। ब्रज उत्सव के अंत में कन्हैया से यही कामना…
“मुझे नाम नहीं बेनाम रहने दो। मुझे तो सिर्फ मेरे कान्हा के चरणों का गुलाम रहने दो”।।
- 8000 वर्ग फीट में बन रहा है कान्हा का दूसरा मंदिर
श्री देव गोपाल लाल जी मंदिर परिसर में ही दूसरे मंदिर का निर्माण हो रहा है उसकी नीव साल 2025 में 9 मई को रखी गई थी। इस मंदिर के लिए रामा जी यादव (काका जी) ने अपना करीब 1800 वर्ग फीट का प्लॉट (वर्तमान कीमत 45 लाख) दान पत्र में दिया है। इस परिसर में करीब 40 लाख की लागत से लगने वाले डोम की घोषणा विधायक शैलेंद्र जैन ने की है। श्री रामा जी यादव के बेटे कृष्ण हरि यादव; मदन गोपाल यादव और राधेश्याम यादव अपने पिता के संस्कार लेकर कान्हा को अपना जीवन समर्पित करने में कहीं पीछे नहीं है!
- बुंदेलखंड ही नहीं प्रदेश भर में राधे-राधे संकीर्तन मंडल की धूम
रामजी यादव (काका जी) ने आज से 55 साल पहले चंद लोगों के साथ जो प्रभातफेरी शुरू की थी; आज उनके बेटों ने “राधे-राधे संकीर्तन मंडल” के नाम से सारे जहां में धूम मचाई है…! नाम मात्र का शुल्क लेकर राधा और कान्हा के गीतों से सनातन धर्म की ध्वजा लेकर धूम मचाने वाले इस मंडल में सदस्य भी कंधे से कंधा मिलाकर साथ दे रहे हैं।
- कान्हा के भक्त 5 साल के बालक से लेकर 100 साल के बुजुर्ग तक
मंडल में 10 साल के बालक से लेकर करीब 100 साल के बुजुर्ग तक भक्ति गीतों पर झूमते हैं। इस मंडल में पुरुषों के अलावा नारी शक्ति भी अपनी सहभागिता निभाती है।
