रहली। नगर में चल रही श्रीमद् रामकथा का आज भव्य और भावपूर्ण समापन हो गया। कथा व्यास भगवतानंद गिरी जी महाराज ने अंतिम दिन भरत मिलाप के प्रेममय प्रसंग से लेकर भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक तक की कथा का श्रवण कराकर उपस्थित समस्त श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
भरत मिलाप के प्रेममय प्रसंग का वर्णन
कथा व्यास भगवतानंद गिरी जी महाराज ने सर्वप्रथम भरत मिलाप के अत्यंत मार्मिक प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भरत जी ने प्रेम और त्याग की पराकाष्ठा दिखाते हुए, भगवान राम की दोनों खड़ाऊ को राम सीता का स्वरूप मानकर अपने सिर पर रखा। महाराज जी ने कहा कि भरत जी अयोध्या वापिस आए और उन्होंने 14 वर्षों तक एक संन्यासी की तरह कुटिया में रहकर ही राजकाज का समस्त कामकाज संभाला, जो त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का अद्भुत उदाहरण है।

सीता हरण से राम राज्याभिषेक तक की कथा
कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कथा व्यास ने विस्तार से सीता हरण, सुग्रीव मिलन, लंकापति रावण वध के प्रसंगों का वर्णन किया। कथा के अंतिम चरण में, उन्होंने भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन और भव्य राम राज्याभिषेक की कथा सुनाई, जिसे सुनकर पंडाल में उपस्थित सभी भक्तजन भाव-विभोर हो गए।
आरती और भंडारा प्रसाद वितरण
कथा के सफल समापन पर, विधि-विधान से आरती संपन्न हुई। आरती के पश्चात विशाल भंडारा प्रसाद का वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
कथा के आयोजक और मुख्य यजमान विनोद सोनी और उनके परिवार द्वारा कथा व्यास भगवतानंद गिरी जी महाराज का तिलक लगाकर पूजन किया गया। विदाई स्वरूप उन्हें वस्त्र, दक्षिणा आदि भेंट कर सम्मानित किया गया। कथा व्यास ने इस सफल आयोजन के लिए समस्त आयोजक मंडल और बड़ी संख्या में कथा श्रवण करने वाले सभी श्रोताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया
