Wednesday, February 4, 2026
Homeदेशलात का कमाल और सड़क का 'कोमल' हाल:व्यंग

लात का कमाल और सड़क का ‘कोमल’ हाल:व्यंग

दोस्त, खुश हो जाओ! यह सड़क का टूटना नहीं, तुम्हारे 'बाहुबली' बनने का प्रमाण है। अधिकारी तो बस तुम्हारी शक्ति का परीक्षण करने के लिए ऐसी 'इको-फ्रेंडली' और 'फ्लेक्सिबल' सड़कें बनवा रहे हैं।"


मेरे परम मित्र प्यारे मोहन ने जब सड़क की वह बदहाल तस्वीर दिखाई, तो उनके माथे पर चिंता की लकीरें वैसी ही थीं जैसे सड़क पर दरारें। उन्होंने झुंझलाकर पूछा— “आखिर ये मच क्या रहा है? ये सड़क है या बिस्किट का चूरा?”
अब प्यारे मोहन को चुप कराना उतना ही मुश्किल है जितना इन गड्ढों से बचकर निकलना। मैंने मुस्कुराकर कहा— “मित्र, तुम गलत देख रहे हो। इसे PWD की नाकामी नहीं, बल्कि अपनी बढ़ती हुई ‘दिव्य शक्ति’ मानो!”

  • विटामिन का कमाल: मैंने उन्हें समझाया कि सरकार की सख्ती से अब हमें इतना शुद्ध और पौष्टिक आहार मिल रहा है कि हमारे पैरों में ‘सुपरमैन’ जैसी ताकत आ गई है। अब हम चलते नहीं, बल्कि सड़क का ‘अभिषेक’ करते चलते हैं। जहाँ पैर रखते हैं, वहां सड़क गौरव के मारे फट जाती है।
  • अहिंसक सड़कें: हमारे प्राधिकरण अब गांधीवादी हो गए हैं। वे नहीं चाहते कि सड़क पर चलते हुए किसी के पैर में मोच आए, इसलिए उन्होंने सड़क को इतना ‘मुलायम’ और ‘भुरभुरा’ बना दिया है कि वह आपके स्पर्श मात्र से पिघल जाए।
  • बोरवेल उद्योग पर संकट: अगर हम इसी तरह फल-दूध खाकर ताकतवर होते रहे, तो बुजुर्गों की वह कहावत— “जहाँ लात मारो वहां पानी निकाल दे”—सच होने ही वाली है। फिर बोरवेल की मशीनों की जरूरत ही क्या? बस एक पहलवान को बुलाओ, सड़क पर दो लात जमाए और लो… नया हैंडपंप तैयार!
    मैंने प्यारे मोहन से कहा— “दोस्त, खुश हो जाओ! यह सड़क का टूटना नहीं, तुम्हारे ‘बाहुबली’ बनने का प्रमाण है। अधिकारी तो बस तुम्हारी शक्ति का परीक्षण करने के लिए ऐसी ‘इको-फ्रेंडली’ और ‘फ्लेक्सिबल’ सड़कें बनवा रहे हैं।”
    इतना सुनते ही प्यारे मोहन की हंसी के फुहारे छूट पड़े और वे अपनी ‘विनाशकारी लातों’ को संभालते हुए इन पंक्तियों को कहते हुए
  • काम पर निकल गए।
  • देख सड़क की दुर्दशा, मोहन हुए उदास,
  • मैंने हंसकर कह दिया, रखो पूर्ण विश्वास।
  • रखो पूर्ण विश्वास, पैर अब ‘थॉर’ हुए हैं,

Yogesh Soni Editor
Yogesh Soni Editorhttp://khabaronkiduniya.com
पत्रकारिता मेरे जीवन का एक मिशन है,जो बतौर ए शौक शुरू हुआ लेकिन अब मेरा धर्म और कर्म बन गया है।जनहित की हर बात जिम्मेदारों तक पहुंचाना,दुनिया भर की वह खबरों के अनछुए पहलू आप तक पहुंचाना मूल उद्देश्य है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments