मप्र/रहली: मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा विस्मृत हो चुके गोंडवाना वीरों के अद्वितीय योगदान और उनकी गौरवशाली परंपरा को पुनः जनमानस तक पहुँचाने के उद्देश्य से तीन दिवसीय ‘जननायक महोत्सव’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव आदिवासी इतिहास के पुनरुत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रभावी सांस्कृतिक पहल साबित हो रहा है।

प्रथम दिवस: राजा श्यामल साह की गाथा से शुभारंभ
कड़ाके की ठंड के बावजूद हजारों की संख्या में दर्शक पहले दिन के आयोजन के लिए उपस्थित हुए। महोत्सव का शुभारंभ गोंडवाना के पराक्रमी राजा श्यामल साह की वीर गाथा के प्रभावशाली नाटकीय मंचन के साथ हुआ। पेशेवर कलाकारों द्वारा प्रस्तुत इस वीरगाथा को दर्शकों ने अत्यंत उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव के साथ देखा। दर्शकों ने गोंडवाना शासकों के साहस, बलिदान और गौरवपूर्ण इतिहास को स्मरण करते हुए उनकी वीरता की सराहना की।
आने वाले दो दिन: राजा हीरा खान और रानी दुर्गावती का शौर्य
यह महोत्सव नई पीढ़ी को अपने समृद्ध जनजातीय इतिहास से परिचित

- द्वितीय दिवस: महोत्सव के दूसरे दिन राजा हीरा खान की प्रेरणादायी गाथा का मंचन किया जाएगा।
- तृतीय एवं अंतिम दिवस: महोत्सव का समापन गोंडवाना की महान शासिका रानी दुर्गावती की अदम्य शौर्य-गाथा के भव्य नाटकीय प्रदर्शन के साथ होगा।
- इस महोत्सव में विभिन्न गोंडवाना वीरों की ऐतिहासिक और प्रेरणादायी वीरगाथाओं को नाटकीय रूप में मंचित किया जा रहा है, जिससे उनकी बलिदान और गौरवपूर्ण विरासत को चिरस्थायी बनाया जा सके।

मप्र शासन के जनसंस्कृति विभाग द्वारा आयोजित गौंड सभ्यता के महानायकों पर आधारित तीन दिवसीय नृत्य नाटिका का आयोजन के अवसर पर मुख्य अतिथि विधायक गोपाल भार्गव अध्यक्षता नपा अध्यक्ष देवराज सोनी,सीएमओ धनंजय गुमास्ता, पार्षदगण सहित हजारों की संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
