Saturday, March 14, 2026
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आखिर क्या हे बोमा तकनीक जिसके जरिए चीता दुर्गावती रिजर्व लाए जाएंगे..?

सागर जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) में चीतों की पुनर्स्थापना के लिए 'बोमा' तकनीक के निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में घोषणा की है कि अगले दो महीनों के भीतर इस रिजर्व में चीतों को छोड़ा जाएगा।

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व बनेगा चीतों का तीसरा घर

सागर: कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर अभयारण्य के बाद अब मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व, ‘वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व’, चीतों का नया ठिकाना बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में ‘प्रोजेक्ट चीता’ तेजी से सफल हो रहा है और अब सागर-दमोह-नरसिंहपुर जिलों में फैला यह रिजर्व दुनिया का ऐसा पहला क्षेत्र बनेगा जहाँ बाघ, तेंदुआ और चीता तीनों ‘बिग कैट’ एक साथ विचरण करेंगे।

​मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश अब ‘चीता स्टेट’ के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। वर्तमान में प्रदेश में चीतों की कुल संख्या 50 के पार (53) पहुँच गई है, जिसमें कूनो में जन्मे 33 शावक भी शामिल हैं।

आखिर क्या है ‘बोमा’ तकनीक?

​अक्सर जब वन्यजीवों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता है, तो ‘बोमा’ (Boma) तकनीक का उपयोग किया जाता है। यह मूल रूप से अफ्रीकी तकनीक है।

1. बोमा का अर्थ और बनावट

  • बाड़ा (Enclosure): ‘बोमा’ एक प्रकार का विशेष बाड़ा या घेरा होता है। स्वहिली भाषा में इसका अर्थ “किलाबंदी” या “सुरक्षा घेरा” होता है।
  • फनल (Funnel) आकार: इसे अंग्रेजी के ‘V’ अक्षर या फनल के आकार में बनाया जाता है। जानवरों को चौड़े हिस्से से अंदर लाया जाता है और धीरे-धीरे रास्ता संकरा होता जाता है, जो अंत में एक लोडिंग ट्रक या बड़े पिंजरे की ओर खुलता है।

2. उपयोग के प्रकार

  • क्वारेंटाइन बोमा: जब चीते दूसरे देश या पार्क से आते हैं, तो उन्हें सीधे खुले जंगल में नहीं छोड़ा जाता। उन्हें पहले कुछ हफ्तों के लिए ‘क्वारेंटाइन बोमा’ में रखा जाता है ताकि उनकी सेहत और संक्रमण की जांच हो सके।
  • सॉफ्ट रिलीज बोमा: दुर्गावती टाइगर रिजर्व में लगभग 4.5 वर्ग किमी क्षेत्र में एक बड़ा ‘सॉफ्ट रिलीज बोमा’ बनाया जा रहा है। यहाँ चीतों को शिकार करने और नए वातावरण में ढलने का अभ्यास कराया जाता है।

3. तकनीक की खासियत

  • तनाव मुक्त स्थानांतरण: इस तकनीक में जानवरों को बेहोश (Chemical Immobilization) करने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे उनकी जान को खतरा कम रहता है।
  • सुरक्षा: इन बाड़ों में सोलर फेंसिंग (झटका तकनीक) लगाई जाती है ताकि बाहर के शिकारी जानवर (जैसे बाघ या तेंदुआ) अंदर न घुस सकें और चीते सुरक्षित रहें।

दुर्गावती टाइगर रिजर्व क्यों है खास?

  • सबसे बड़ा रिजर्व: यह मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है (लगभग 2,339 वर्ग किमी)।
  • प्राकृतिक शिकार की प्रचुरता: यहाँ चीतों के लिए पर्याप्त मात्रा में चीतल और अन्य छोटे वन्यजीव मौजूद हैं।
  • ऐतिहासिक महत्व: 2010 में जब चीतों को भारत लाने की योजना बनी थी, तब नौरादेही (अब दुर्गावती रिजर्व) को ही पहली पसंद माना गया था।
Yogesh Soni Editor
Yogesh Soni Editorhttp://khabaronkiduniya.com
पत्रकारिता मेरे जीवन का एक मिशन है,जो बतौर ए शौक शुरू हुआ लेकिन अब मेरा धर्म और कर्म बन गया है।जनहित की हर बात जिम्मेदारों तक पहुंचाना,दुनिया भर की वह खबरों के अनछुए पहलू आप तक पहुंचाना मूल उद्देश्य है।
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