एक गांव, जो दीपावली की तरह जगमगा रहा हो। हर तरफ फूलों की सजावट, बंदनवार, और हर घर के दरवाजे पर जगमगाते दीपक और कलश! ये नजारा था रहली के ग्राम हरदी का, जहाँ आज एक विशाल भंडारे और भजन सम्मेलन का आयोजन किया गया।
मप्र /बुंदेलखंड की पावन धरा पर भक्ति और सामूहिकता की एक ऐसी तस्वीर उभरी है, जिसने हर किसी का मन मोह लिया। रहली विधानसभा क्षेत्र के ग्राम हरदी में आयोजित विशाल भंडारे और भजन सम्मेलन ने गांव को ‘मिनी अयोध्या’ और ‘वृंदावन’ के स्वरूप में बदल दिया। इस भव्य आयोजन में न केवल आसपास के 50 से 60 गांवों की भजन मंडलियों ने शिरकत की, बल्कि पूरे गांव ने जिस आत्मीयता से अतिथियों का स्वागत किया, वह मिसाल बन गया है।

दीपावली सा माहौल, फूलों से हुआ स्वागत
हरदी गांव में उत्सव का माहौल किसी दीपावली से कम नहीं था। गांव के हर रास्ते को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। श्रद्धा और परंपरा का अद्भुत मेल तब देखने को मिला जब:
द्वार-द्वार वंदनवार: हर घर के दरवाजे पर कलश स्थापित किए गए और दीपक जलाए गए।
स्वच्छता और सजावट: सड़कों को गोबर से लीपकर सुंदर रंगोलियों से सजाया गया।

अभूतपूर्व आतिथ्य: गांव की महिलाओं और पुरुषों ने आने वाले हर श्रद्धालु पर पुष्प वर्षा की, तिलक लगाया और मीठा खिलाकर उनका स्वागत किया। जगह-जगह फल-फूल, पोहा-जलेबी और खीर के स्टॉल लगाकर सेवा की गई।
भक्तिमय हुआ वातावरण
पूरे गांव में चहुंओर ‘हरे राम’ के संकीर्तन की गूंज सुनाई दे रही थी। हर रास्ते पर भजन मंडलियों की टोलियां अपनी प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय बना रही थीं। इस दौरान क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने भी भंडारे में पूड़ियां सेंककर सेवा दान दिया और भजन मंडलियों के सदस्यों का पुष्प वर्षा कर अभिनंदन किया।

पर सबसे खास बात… यहाँ राजनीति की दीवारें ढह गईं! क्या पक्ष, क्या विपक्ष—आस्था के इस महाकुंभ में तमाम बड़े नेता कढ़ाई के सामने हाथ बंटाते और पूड़ियां तलते नजर आए।
सेवा का ऐसा जज्बा, जहाँ पद नहीं, सिर्फ ‘भक्त’ की पहचान दिखी। धन्य है हरदी की धरा और धन्य है यहाँ की एकता!”

एकता और सद्भाव का संदेश
ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के आयोजनों से न केवल धार्मिक जागृति आती है, बल्कि आपसी भाईचारा और एकता भी सुदृढ़ होती है। ग्राम हरदी के इस भव्य आयोजन की चर्चा अब पूरे रहली क्षेत्र में हो रही है।https://youtube.com/shorts/cmIVFh16EEw?si=K_MVW-iwpsSnSdXX
