Sunday, February 15, 2026
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ईंट-गारे के ‘आरोग्य मंदिर’ तो खड़े हुए, पर कब विराजेंगे सेवा के ‘देवता’?

जब तक अस्पताल के गलियारों में सिसकियों को सुनने वाला और घावों को भरने वाला 'देवता' मौजूद नहीं होगा, तब तक ये इमारतें केवल चुनावी पत्थर बनकर रह जाएंगी

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किसी भी मंदिर की सार्थकता उसमें प्रतिष्ठित देवता से होती है। स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में, चिकित्सक (डॉक्टर) और नर्सिंग स्टाफ ही वे ‘देवता’ हैं जो इन केंद्रों में प्राण फूंकते हैं।

​आज प्रदेश के कोने-कोने में कंक्रीट के आलीशान ढांचे खड़े हो रहे हैं। सरकारें इसे ‘स्वास्थ्य क्रांति’ का नाम दे रही हैं। तहसील से लेकर ग्राम पंचायतों तक ‘आरोग्यता के मंदिरों’ (अस्पतालों) का निर्माण युद्ध स्तर पर जारी है। सफेद पुताई, चमकती टाइलें और बड़े-बड़े साइनबोर्ड दूर से ही चमकते हैं, लेकिन एक बुनियादी सवाल इस चमक को फीका कर देता है—क्या सिर्फ ईंट-गारे की दीवारों से इलाज संभव है?

​दुर्भाग्य यह है कि बीते वर्षों में जो अस्पताल बने, उनमें से अधिकांश आज ‘खंडहर’ में तब्दील हो चुके हैं। कारण स्पष्ट है:
​पदों की रिक्तता: भवन तो बन गए, लेकिन वहां बैठने वाले डॉक्टरों की नियुक्ति कागजों से बाहर नहीं आ पाई।
​सुविधाओं का अभाव: जहाँ डॉक्टर पहुंचे, वहाँ दवाइयां नहीं थीं; जहाँ दवाइयां थीं, वहाँ मशीनें चलाने वाले तकनीशियन नहीं थे।
​रखरखाव की कमी: बिना उपयोग के इन भवनों की छतें टपकने लगीं और परिसर झाड़-झंखाड़ का बसेरा बन गए।

​दीवारों में नहीं, इलाज में बसती है सेहत
​सरकारें आती-जाती हैं और निर्माण के नए कीर्तिमान स्थापित करती हैं। आंकड़ों की बाजीगरी में बताया जाता है कि कितने नए सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोले गए। लेकिन सवाल वही है—क्या ईंट-पत्थर किसी मरीज की नब्ज टटोल सकते हैं?

जब तक अस्पताल के गलियारों में सिसकियों को सुनने वाला और घावों को भरने वाला ‘देवता’ मौजूद नहीं होगा, तब तक ये इमारतें केवल चुनावी पत्थर बनकर रह जाएंगी। आरोग्यता के मंदिर तभी सार्थक हैं जब वहां उपचार का आशीर्वाद मिले, अन्यथा “राम जाने” कि आने वाली पीढ़ियां इन खाली इमारतों को किस नजरिए से देखेंगी।

Yogesh Soni Editor
Yogesh Soni Editorhttp://khabaronkiduniya.com
पत्रकारिता मेरे जीवन का एक मिशन है,जो बतौर ए शौक शुरू हुआ लेकिन अब मेरा धर्म और कर्म बन गया है।जनहित की हर बात जिम्मेदारों तक पहुंचाना,दुनिया भर की वह खबरों के अनछुए पहलू आप तक पहुंचाना मूल उद्देश्य है।
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