मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार।
साल 2026 का यह पहला ‘मन की बात’ है। कल 26 जनवरी को हम सभी ‘गणतंत्र दिवस’ का पर्व मनाएंगे। इसी दिन हमारा संविधान लागू हुआ था। 26 जनवरी का ये दिन हमें अपने संविधान निर्माताओं को नमन करने का अवसर देता है। आज 25 जनवरी का दिन भी बहुत अहम है। आज ‘National Voters’ Day’ है ‘मतदाता दिवस’ है। मतदाता ही लोकतंत्र की आत्मा होता है।
साथियो,
आमतौर पर जब कोई 18 साल का हो जाता है, मतदाता बन जाता है तो उसे जीवन का एक सामान्य पड़ाव समझा जाता है। लेकिन, दरअसल ये अवसर किसी भी भारतीय के जीवन का बहुत बड़ा milestone होता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि हम देश में वोटर बनने का, मतदाता बनने का, उत्सव मनाएं। जैसे हम जन्मदिन पर शुभकामनाएं देते हैं और उसे celebrate करते हैं, ठीक वैसे ही, जब भी कोई युवा पहली बार मतदाता बने तो पूरा मोहल्ला, गाँव या फिर शहर एकजुट होकर उसका अभिनंदन करे और मिठाइयाँ बांटी जाएं। इससे लोगों में voting के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। इसके साथ ही यह भावना और सशक्त होगी कि एक वोटर होना कितना मायने रखता है।
साथियो,
देश में जो भी लोग चुनावी प्रक्रिया से जुड़े रहते हैं, जो हमारे लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखने के लिए जमीनी स्तर पर काम करते हैं, मैं उन सभी की बहुत सराहना करना चाहूँगा। आज ‘मतदाता दिवस’ पर मैं अपने युवा साथियों से फिर आग्रह करूंगा कि वे 18 साल का होने पर voter के रूप में खुद को जरूर register करें। संविधान ने हर नागरिक से जिस कर्त्तव्य भावना के पालन की अपेक्षा रखी है इससे वो अपेक्षा भी पूरी होगी और भारत का लोकतंत्र भी मजबूत होगा।
मेरे प्यारे देशवासियो,
इन दिनों मैं social media पर एक interesting trend देख रहा हूँ। लोग साल 2016 की अपनी यादों को फिर से ताजा कर रहे हैं। उसी भावना के साथ, आज मैं भी आपके साथ अपनी एक memory को share करना चाहता हूँ। दस साल पहले, जनवरी 2016 में हमने एक ambitious journey की शुरुआत की थी। तब हमें इस बात का एहसास था कि भले ही ये एक छोटा क्यों ना हो ये, लेकिन ये युवा-पीढ़ी के लिए, देश के future के लिये, काफी अहम है। तब कुछ लोग ये समझ ही नहीं पाए थे कि ये आखिर है क्या ? साथियो, मैं जिस journey की बात कर रहा हूँ, वह है start-up India की journey। इस अद्भुत journey के heroes हमारे युवा साथी हैं। अपने comfort zone से बाहर निकलकर उन्होंने जो innovation किए, वो इतिहास में दर्ज हो रहे हैं।
साथियो,
भारत में आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा start-ups ecosystem बन चुका है। ये start-ups लीक से हट के हैं। आज, वे, ऐसे sectors में काम कर रहे हैं, जिनके बारे में 10 साल पहले तक कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। AI, Space, Nuclear Energy, Semi Conductors, Mobility, Green Hydrogen, Biotechnology आप नाम लीजिए और कोई न कोई भारतीय Start-up उस sector में काम करते हुए दिख जाएगा। मैं अपने उन सभी युवा-साथियों को salute करता हूँ जो किसी-न-किसी Start-up से जुड़े हैं या फिर अपना Start-up शुरू करना चाहते हैं|
साथियो,
आज ‘मन की बात’ के माध्यम से मैं देशवासियों, विशेषकर industry और Start-up से जुड़े युवाओं से एक आग्रह जरूर करना चाहता हूँ। भारत की economy तेजी से आगे बढ़ रही है। भारत पर दुनिया की नजरें हैं। ऐसे समय में हम सब पर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है। वो जिम्मेदारी है – quality पर जोर देने की। होती है, चलती है, चल जाएगा, यह युग चला गया। आइए इस वर्ष हम पूरी ताकत से quality को प्राथमिकता दें। हम सबका एक ही मंत्र हो quality, quality और सिर्फ quality. कल से आज बेहतर quality. हम जो भी manufacture कर रहे हैं, उसकी quality को बेहतर बनाने का संकल्प लें। चाहे हमारे textiles हों, technology हो या फिर electronics even packaging, Indian product का मतलब ही बन जाए – Top quality. आइए, excellence को हम अपना bench mark बनाएं। हम संकल्प लें quality में ना कोई कमी होगी, ना quality से कोई समझौता होगा और मैंने तो लाल किले से कहा था ‘Zero defect – Zero effect’. ऐसा करके ही हम विकसित भारत की यात्रा को तेजी से आगे ले जा पाएंगे।
मेरे प्यारे देशवासियो,
हमारे देश के लोग बहुत innovative हैं। समस्याओं का समाधान ढूँढना हमारे देशवासियों के स्वभाव में है। कुछ लोग ये काम start-ups के जरिये करते हैं, तो कुछ लोग समाज की सामूहिक शक्ति से रास्ता निकालने का प्रयास करते हैं। ऐसा ही एक प्रयास उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में सामने आया है। यहाँ से होकर गुजरने वाली तमसा नदी को लोगों ने नया जीवन दिया है। तमसा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की सजीव धारा है। अयोध्या से निकलकर गंगा में समाहित होने वाली यह नदी कभी इस क्षेत्र के लोगों के जन-जीवन की धुरी हुआ करती थी, लेकिन प्रदूषण की वजह से इसकी अविरल धारा में रुकावट आने लगी थी। गाद, कूड़ा-कचरा और गंदगी ने इस नदी के प्रवाह को रोक दिया था। इसके बाद यहाँ के लोगों ने इसे एक नया जीवन देने का अभियान शुरू किया। नदी की सफाई की गई और उसके किनारों पर छायादार, फलदार पेड़ लगाए गए। स्थानीय लोग कर्तव्य भावना से इस काम में जुटे और सबके प्रयास से नदी का पुनरुद्धार हो गया।
साथियो,
जन-भागीदारी का ऐसा ही प्रयास आंध्र-प्रदेश के अनंतपुर में भी देखने को मिला है। यह वह क्षेत्र है जो सूखे की गम्भीर समस्या से जूझता रहा है। यहाँ की मिट्टी, लाल और बलुई है। यही वजह है कि लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। यहां के कई क्षेत्रों में लंबे समय तक बारिश नहीं होती है। कई बार तो लोग अनंतपुर की तुलना रेगिस्तान में सूखे की स्थिति से भी कर देते हैं।
साथियो,
इस समस्या के समाधान के लिये स्थानीय लोगों ने जलाशयों को साफ करने का संकल्प लिया। फिर प्रशासन के सहयोग से यहाँ ‘अनंत नीरू संरक्षणम प्रोजेक्ट’ इसकी शुरुआत हुई। इस प्रयास के तहत 10 से अधिक जलाशयों को जीवन दान मिला है। उन जलाशयों में अब पानी भरने लगा है। इसके साथ ही 7000 से अधिक पेड़ भी लगाए गए हैं। यानि अनंतपुर में जल संरक्षण के साथ-साथ green cover भी बढ़ा है। यहाँ बच्चे अब तैराकी का आनंद भी ले सकते हैं। एक प्रकार से कहें तो यहाँ का पूरा ecosystem फिर से निखर उठा है।
साथियो,
आजमगढ़ हो, अनंतपुर हो, या फिर देश की कोई और जगह, ये देखकर खुशी होती है कि लोग एकजुट होकर कर्तव्य भाव से बड़े संकल्प सिद्ध कर रहे हैं। जन-भागीदारी और सामूहिकता की यही भावना हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है।
मेरे प्यारे देशवासियो,
हमारे देश में भजन और कीर्तन सदियों से हमारी संस्कृति की आत्मा रहे हैं। हमने मंदिरों में भजन सुने हैं, कथा सुनते वक्त सुने हैं और हर दौर ने भक्ति को अपने समय के हिसाब से जिया है। आज की पीढ़ी भी कुछ नए कमाल कर रही है। आज के युवाओं ने भक्ति को अपने अनुभव और अपनी जीवन-शैली में ढाल दिया है। इसी सोच से एक नया सांस्कृतिक चलन उभरकर सामने आया है। आपने social media पर ऐसे video जरूर देखे होंगे। देश के अलग-अलग शहरों में बड़ी संख्या में युवा इकट्ठा हो रहे हैं। मंच सजा होता है, रोशनी होती है, संगीत होता है, पूरा ताम-झाम होता है और माहौल किसी concert से जरा भी कम नहीं होता है। ऐसा ही लग रहा है कि जैसे कोई बहुत बड़ा concert हो रहा है, लेकिन वहाँ जो गाया जा रहा होता है वो पूरी तन्मयता के साथ, पूरी लगन के साथ, पूरी लय के साथ भजन की गूंज। इस चलन को आज ‘भजन clubbing’ कहा जा रहा है और यह खासतौर पर Genz के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह देखकर अच्छा लगता है कि इन आयोजनों में भजन की गरिमा और शुचिता का पूरा ध्यान रखा जाता है। भक्ति को हल्केपन में नहीं लिया जाता। ना शब्दों की मर्यादा टूटती है और ना ही भाव की। मंच आधुनिक हो सकता है, संगीत की प्रस्तुति अलग हो सकती है, लेकिन मूल भावना वही रहती है। अध्यात्म का एक निरंतर प्रवाह वहाँ अनुभव होता है।
मेरे प्यारे देशवासियो,
आज हमारी संस्कृति और त्योहार दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहे हैं। दुनिया के हर कोने में भारत के त्योहार बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाए जाते हैं। हर तरह की cultural vibrancy को बनाए रखने में हमारे भारतवंशी भाई-बहनों का अहम योगदान है। वो जहां भी है वहाँ अपनी संस्कृति की मूल भावना को संरक्षित कर और उसे आगे बढ़ा रहे हैं। इसको लेकर मलेशिया में भी हमारा भारतीय समुदाय बहुत सराहनीय कार्य कर रहा है। आपको यह जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि मलेशिया में 500 से ज्यादा तमिल स्कूल हैं। इनमें तमिल भाषा की पढ़ाई के साथ ही अन्य विषयों को भी तमिल में पढ़ाया जाता है। इसके अलावा यहां तेलुगु और पंजाबी सहित अन्य भारतीय भाषाओं पर भी बहुत focus रहता है।
साथियो,
भारत और मलेशिया के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में एक society की बड़ी भूमिका है। इसका नाम है ‘Malaysia India Heritage Society’। अलग-अलग कार्यक्रमों के साथ ही, यह संस्था एक heritage walk का भी आयोजन करती है। इसमें दोनों देशों को आपस में जोड़ने वाले सांस्कृतिक स्थलों को cover किया जाता है। पिछले महीने मलेशिया में ‘लाल पाड़ साड़ी’ iconic walk इसका आयोजन किया गया। इस साड़ी का बंगाल की हमारी संस्कृति से विशेष नाता रहा है। इस कार्यक्रम में सबसे अधिक संख्या में इस साड़ी को पहनने का record बना, जिसे Malaysian Book of Records में दर्ज किया गया। इस मौके पर ओडिसी dance और baul music ने तो लोगों का दिल जीत लिया। मैं कह सकता हूँ –
