देश हो या विदेश हर जगह वृंदावन के युवा कथावाचक श्री इंद्रेश उपाध्याय के हजारों फैन हे,लाखों फॉलोवर हे।अक्सर लोगों को सोशल मीडिया पर उनके द्वारा गाए गए भजनों और पदों को सुनते हुए देखा जाता हे। हाल ही के चार पांच सालों में उनकी प्रसिद्धि और कीर्ति देश विदेश में बढ़ रही हे।आखिर ऐसा क्या हे जो रातों रात प्रसिद्धि बढ़ती ही जा रही हे। वैसे तो सब किस्मत का खेल हे,,लेकिन बृजवास, बिहारी जी और संतो की कृपा और तप से सब प्राप्त हो जाता हे। फिर भी सामान्य नजरिए से देखे तो कुछ कारण स्पष्ट होते हे।जैसे पारंपरिक कथावाचन की परिधि को तोड़ते हुए एक नई और सहज-सरल शैली का सूत्रपात किया है।

श्री इंद्रेश उपाध्याय की सबसे बड़ी विशिष्टता उनकी अत्यंत सरल और सहज शैली तथा मधुर वाणी है। जहाँ अनेक कथावाचक पांडित्यपूर्ण भाषा का प्रयोग करते हैं, वहीं इंद्रेश जी का प्रवचन सीधे श्रोता के अंतर्मन को स्पर्श करता है। उनकी वाणी में एक नैसर्गिक माधुर्य है, जो श्रोताओं को अनायास ही कथा के भावजगत में खींच ले जाता है। इस सहजता को उनकी भगवत् कृपा से प्राप्त जन्मजात देन माना जाता है, जिसने उनके यश को ‘सोने पर सुहागा’ की तरह बढ़ाया है।
🎶 पद गायन और संगीतमय प्रस्तुति
इंद्रेश जी केवल कथा का वाचन नहीं करते, बल्कि वह पद गायन के माध्यम से भक्ति रस की सरिता बहाते हैं। उन्होंने कथा को एक संगीतमय आयाम दिया है। उनका पैटर्न पारंपरिक न होकर नवप्रवर्तन से युक्त है।
- पुनर्संयोजित भजन: उन्होंने पुराने, अमर भजनों को एक विशेष संगीत संयोजन के साथ नए रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे ये आज के श्रोताओं, विशेषकर युवाओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो गए हैं।
- भक्तों के लिखे पद: वह केवल प्रचलित भजनों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विभिन्न भक्त कवियों के लिखे पदों को अपनी कथा में समाहित करते हैं, जिससे साहित्य और भक्ति का अद्भुत समन्वय होता है।

- इन सबमें मुख्य कारण रहा भगवान श्री कृष्ण की बालपन की अनेक लीलाओं का वर्णन अनेक ग्रंथों से निकलकर अपनी कथा में सुनाए, पारंपरिक रूप से कथा वाचक चार पांच बाल लीलाओं का वर्णन( पूतना वध से लेकर रास तक) कर प्रसंग में आगे बढ़ जाते,यही बात इंद्रेश जी ने पकड़ी और भगवान की बाल लिलाए ,विभिन्न भक्तों के काव्य से लेकर अपनी कथा में प्रस्तुत की और पूरी कथा का विशेष जोर बाल लीलाओं पर रखा। बस यही बात श्रोताओं को भा गई कि यह प्रसंग तो कभी सुनने ही नहीं मिले,यही से इंद्रेश उपाध्याय जी मशहूर होते गए।आज आलम यह हे कि देश तो ठीक विदेश में उनके लाखों फॉलोवर हे,बड़े बड़े संत इंद्रेश जी की प्रशंसा करते नहीं थकते।

हाल ही में 19 से 25 नवंबर तक इंद्रेश जी द्वारा मप्र के सागर में विधायक शैलेंद्र जैन द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा में कथा का वाचन किया जा रहा हे।

कथा सिध्द पीडी से होती है ना कि स्वयं से,,
पूज्य श्री इन्द्रेश जी की कथा का सारा श्रेय पूज्य गुरुदेव भागवत भास्कर श्री कृष्णचंन्द्र शास्त्री (ठाकुर जी) का है::
क्योंकि ठाकुर जी से सरस मधुर वक्ता आज तक बृजपृदेश में हुआ ही नहीं है!
सोशलमीडिया का उस समय इतना उपयोग नहीं था, परंतु बृज में ठाकुर जी की कथा ऐसी थी, मानो हजारों संत 88 हजार ऋषि है, ओर पूज्य गुरुदेव श्री कृष्णचंन्द्र शास्त्री जी सूत जी की तरह शोभायमान होकर कथा वाचन करते थे_जिस कथा को सुनकर निद्रा पर विजय प्राप्त संतों को नींद आ जाती थी_इतनी मीठी कथा कहते थे, श्लोक की लय तो अदभुत आहा
आज से 3 साल इन्द्रेश जी को सभी यही बोलते थे कि आंखे गडाकर रूखी सी कथा करते हैं, लेकिन संतों का आशीर्वाद पूज्य पिताजी की कृपा से वही आंखे गडाना उनका भाव बन गया!!
पूज्य इन्द्रेश जी के पीछे उनकी पीढ़ियों का श्रेय है जिसका पालन करना पूज्य इन्द्रेश जी को भलीभाँति आ गया!!
नहीं तो नये नये के चक्कर में सब जयरामजी हो गया होता!
सिंगर बनने के शौकीन थे -तो संगीत पैतृक
और कथा पैतृक
अत: उनका श्रेय यह है कि उन्होंने अपनी परम्परागत प्राप्त कथा का भलीभाँति निर्वाहन किया ओर करेगे!
हमारी शुभकामनाएं है
श्री राधाकृष्ण राधा🙏🙏