यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है। सर्दियों के मौसम में तापमान गिरने के साथ ही हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम काफी बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों की तुलना में सर्दियों में हार्ट अटैक के मामले लगभग 25% से 30% तक बढ़ जाते हैं।
सर्दियों का मौसम आते ही अस्पतालों के कार्डियोलॉजी विभाग में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। सुबह की सैर पर जाने वाले बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, ठंड का असर हर किसी के दिल पर पड़ रहा है। आखिर ऐसा क्या होता है कि पारा गिरते ही हमारा दिल कमजोर पड़ने लगता है?
ठंड में हार्ट अटैक आने के प्रमुख कारण
- नसों का सिकुड़ना (Vasoconstriction):
ठंड में शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए हमारी रक्त वाहिकाएं (blood vessels) सिकुड़ जाती हैं। इससे रक्त के प्रवाह में रुकावट आती है और हृदय को शरीर में खून पंप करने के लिए सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है। - ब्लड प्रेशर का बढ़ना:
नसों के सिकुड़ने और अधिक मेहनत के कारण ब्लड प्रेशर (BP) बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ बीपी सीधे तौर पर हार्ट अटैक या स्ट्रोक को न्यौता देता है। - खून का गाढ़ा होना:
सर्दियों में शरीर में फाइब्रिनोजेन (Fibrinogen) और अन्य प्रोटीन्स का स्तर बढ़ जाता है, जिससे खून गाढ़ा होने लगता है। गाढ़ा खून ‘ब्लड क्लॉट’ यानी थक्के बनने की संभावना बढ़ा देता है, जो धमनी को ब्लॉक कर सकते हैं। - शारीरिक गतिविधि में कमी और खानपान:
ठंड में लोग अक्सर आलसी हो जाते हैं और तला-भुना या अधिक कैलोरी वाला भोजन करते हैं। व्यायाम की कमी और बढ़ता कोलेस्ट्रॉल दिल की सेहत को बिगाड़ देता है। - विटामिन-डी की कमी:
धूप कम निकलने के कारण शरीर में विटामिन-डी की कमी हो जाती है, जो हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाने में एक सहायक कारक माना जाता है।
बचाव के प्रभावी उपाय
दिल को सुरक्षित रखने के लिए अपनी दिनचर्या में ये बदलाव जरूर करें: - गर्म कपड़ों की लेयरिंग: केवल एक मोटा कोट पहनने के बजाय कपड़ों की कई परतें (Layers) पहनें। सिर और कान को टोपी से ढक कर रखें, क्योंकि शरीर की अधिकांश गर्मी सिर से निकलती है।
- सुबह जल्दी सैर से बचें: कड़ाके की ठंड और कोहरे में सुबह 4-5 बजे बाहर निकलने के बजाय, धूप निकलने के बाद ही सैर पर जाएं या घर के अंदर ही योगाभ्यास करें।
- हल्का और सुपाच्य भोजन: अधिक नमक, मक्खन और घी वाले भोजन से परहेज करें। सूप, हरी सब्जियां और गुनगुना पानी पिएं।
- नियमित चेकअप: यदि आप पहले से ही बीपी या शुगर के मरीज हैं, तो नियमित अंतराल पर अपनी जांच करवाएं और दवाएं समय पर लें।
- धूम्रपान और शराब से दूरी: कई लोग सोचते हैं कि शराब शरीर को गर्म रखेगी, लेकिन यह हृदय की गति को अनियंत्रित कर सकती है और नसों को नुकसान पहुंचाती है।
चेतावनी के संकेत (Warning Signs)
यदि आपको या आपके आसपास किसी को सीने में भारीपन, बायीं बांह में दर्द, अत्यधिक पसीना आना या सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, तो इसे ‘गैस’ समझकर नजरअंदाज न करें। यह हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
