Saturday, March 21, 2026
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RBI:चिल्लर के बदले टॉफियां,मप्र में दुकानदार वैद्य मुद्रा का लेने से इंकार

मप्र में नहीं चल रहे ₹1/₹2 के सिक्के और ₹5 का नोट! दुकानदार कर रहे मनमानी, चिल्लर के नाम पर थमा रहे टॉफियां आरबीआई के नियमों का खुलेआम उल्लंघन; वैध मुद्रा लेने से इनकार करना कानूनी अपराध

मध्य प्रदेश के कई शहरों और कस्बों में ₹1 और ₹2 के सिक्के, और ₹5 के नोट को लेकर आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। दुकानदारों द्वारा इन वैध मुद्राओं को लेने से इनकार करने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं, ग्राहक जब ₹8 या ₹9 की वस्तु खरीदते हैं, तो चिल्लर (शेष राशि) लौटाने के बजाय जबरन ₹1-₹2 की टॉफियां या कैंडीज थमाई जा रही हैं, जिससे दुकानदार छोटे लेन-देन में भी अनुचित लाभ कमा रहे हैं।
आरबीआई के नियम हवा में:
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, यह मनमाना व्यवहार जारी है। RBI के नियमानुसार, ₹1, ₹2, ₹5, ₹10, और ₹20 के सभी सिक्के और सभी मूल्यवर्ग के नोट (जब तक कि आधिकारिक रूप से चलन से बाहर न हों) पूरी तरह से वैध मुद्रा (Legal Tender) हैं। इन्हें लेने से इनकार करना भारतीय मुद्रा अधिनियम (Coinage Act) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत एक कानूनी अपराध है।
ग्राहकों से अनुचित व्यापार:
विशेषज्ञों का कहना है कि चिल्लर के बदले जबरन टॉफी देना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। ग्राहक को शेष राशि के रूप में वैध मुद्रा प्राप्त करने का पूरा अधिकार है। दुकानदारों द्वारा चिल्लर की कमी का बहाना बनाना और छोटे मूल्य की टॉफियां देना, उनकी लाभ कमाने की मंशा को दर्शाता है।
इस संबंध में यूपी का उदाहरण भी सामने आया है, जहां सिक्कों और ₹5 के नोट का चलन सामान्य रूप से जारी है।
नागरिकों को क्या करना चाहिए?
इस मामले पर एक जागरूक नागरिक ने बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए लोगों को कानूनी कार्रवाई के बारे में जानना जरूरी है। आरबीआई के नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों के खिलाफ निम्नलिखित कार्रवाई की जा सकती है:

  • पुलिस में शिकायत: बार-बार वैध मुद्रा लेने से मना करने वाले व्यक्ति के खिलाफ स्थानीय पुलिस स्टेशन में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जा सकती है।
  • उपभोक्ता फोरम: चिल्लर के नाम पर टॉफी देने या अनुचित व्यवहार की शिकायत उपभोक्ता फोरम या उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रकोष्ठ में दर्ज की जा सकती है।
  • आरबीआई को जानकारी: इस तरह के गैर-कानूनी चलन की जानकारी सीधे भारतीय रिजर्व बैंक के जन शिकायत निवारण प्रकोष्ठ को भी दी जा सकती है।
    आवश्यक है कि प्रशासन और RBI इस मामले का संज्ञान लें और ग्राहकों को हो रही इस परेशानी को दूर करने के लिए दुकानदारों पर सख्त कार्रवाई करें, ताकि आम नागरिक का छोटे नोटों और सिक्कों पर विश्वास बना रहे।
Yogesh Soni Editor
Yogesh Soni Editorhttp://khabaronkiduniya.com
पत्रकारिता मेरे जीवन का एक मिशन है,जो बतौर ए शौक शुरू हुआ लेकिन अब मेरा धर्म और कर्म बन गया है।जनहित की हर बात जिम्मेदारों तक पहुंचाना,दुनिया भर की वह खबरों के अनछुए पहलू आप तक पहुंचाना मूल उद्देश्य है।
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