Saturday, March 21, 2026
Homeकाव्य संग्रह/ आलेखव्यंग–वाणडबल इंजन की सरकार तो त्योहार भी डबल हो गए:व्यंग

डबल इंजन की सरकार तो त्योहार भी डबल हो गए:व्यंग

जब हर चीज डबल हो रही है—सड़कें डबल, डिजिटल इंडिया डबल, तो त्योहार सिंगल क्यों रहें? कांग्रेस के जमाने में हम गरीब थे, इसलिए एक ही दिन में त्योहार निपटा देते थे। अब देश समृद्ध हो रहा है

शाम को मित्र प्यारे मोहन मिले, तो चेहरे पर वैसी ही बारह बजी थी जैसी बजट के बाद मध्यम वर्ग के चेहरे पर बजती है। उनके माथे की लकीरें बता रही थीं कि समस्या वैश्विक नहीं, बल्कि ‘कैलेंडर’ संबंधी है।
​पास आते ही बोले, “यार, ये संक्रांति 14 को मनाऊं या 15 को? समझ नहीं आ रहा दान-पुण्य कब करना है और खिचड़ी कब गटकनी है।”
​मैंने हंसते हुए कहा, “भाई, इसमें उलझने की क्या बात है? पिछले कुछ सालों से देख रहे हो न, अब हर त्योहार ‘बाय वन गेट वन फ्री’ की तरह दो-दो दिन आता है। यह तो उत्सव का विस्तार है!”
​प्यारे मोहन झुंझला गए। बोले, “विस्तार नहीं, विनाश है! एक दिन के त्योहार में जेब का जो हाल होता है, वो मैं जानता हूं। अब दो दिन तक क्या मेहमानों को ‘अंडर ऑब्जर्वेशन’ रखूं? ऊपर से ये पंडित जी और पंचांग वालों ने अलग ही कन्फ्यूजन फैला रखा है।”
​मैंने उनकी चिंता पर ‘विकास’ का मरहम लगाते हुए गंभीरता से कहा, “मोहन भाई, तुम बात की गहराई नहीं समझ रहे। इसे सकारात्मक नजरिए से देखो। जो काम कांग्रेस 70 साल में नहीं कर पाई, वो भाजपा ने 10-12 सालों में ही कर दिखाया। इसे ही तो कहते हैं असली विकास!”
​मोहन ने चौंक कर पूछा, “त्योहारों के दो दिन होने में सरकार का क्या हाथ?”
​मैंने मुस्कुराते हुए समझाया, “अरे भाई, जब हर चीज डबल हो रही है—सड़कें डबल, डिजिटल इंडिया डबल, तो त्योहार सिंगल क्यों रहें? कांग्रेस के जमाने में हम गरीब थे, इसलिए एक ही दिन में त्योहार निपटा देते थे। अब देश समृद्ध हो रहा है, तो त्योहार भी ‘ओवरटाइम’ कर रहे हैं। कम से कम दो दिन तो ये अहसास रहता है कि हम उत्सवधर्मी राष्ट्र हैं।”
​इतना सुनते ही प्यारे मोहन ने मुझे ऐसे देखा जैसे मैं कोई ‘चुनावी घोषणापत्र’ पढ़ रहा हूं। इससे पहले कि मैं उन्हें ‘डबल इंजन के त्योहार’ के और फायदे गिनाता, मित्रवर बिना ‘दही-चूड़ा’ खिलाए ही वहां से नौ-दो-ग्यारह हो गए।

Yogesh Soni Editor
Yogesh Soni Editorhttp://khabaronkiduniya.com
पत्रकारिता मेरे जीवन का एक मिशन है,जो बतौर ए शौक शुरू हुआ लेकिन अब मेरा धर्म और कर्म बन गया है।जनहित की हर बात जिम्मेदारों तक पहुंचाना,दुनिया भर की वह खबरों के अनछुए पहलू आप तक पहुंचाना मूल उद्देश्य है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular