- रहली का ‘मिनी मैहर’ टिकीटोरिया धाम: जहाँ 365 सीढ़ियों पर कदम रखते ही दूर होती हैं सारी मुश्किलें। देखिए रिपोर्ट—”
मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल में आस्था का एक ऐसा केंद्र जहाँ पहुँचते ही मन को असीम शांति और अलौकिक ऊर्जा का अहसास होता है—वह है रहली का प्रसिद्ध टिकीटोरिया माता मंदिर। रहली-जबलपुर मार्ग पर मुख्य सड़क से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर सागौन के घने जंगलों के बीच स्थित इस सिद्ध धाम को क्षेत्र में ‘मिनी मैहर’ के नाम से जाना जाता है। नवरात्र के दिनों में यहाँ का नजारा देखते ही बनता है, जहाँ दूर-दूर से भक्त माता के दर्शन के लिए उमड़ते हैं।
मराठाकालीन इतिहास और अटूट आस्था की दास्तान
इतिहास के पन्नों और किंवदंतियों के अनुसार, टिकीटोरिया का यह मंदिर मराठाकालीन है। जानकारों के मुताबिक, इसका निर्माण 1732 से 1815 के मध्य पं. गोपालराव और रानी लक्ष्मीबाई के काल में हुआ था, तब यहाँ पत्थर की प्राचीन मूर्ति स्थापित की गई थी। कालांतर में आक्रमणकारियों द्वारा मूर्ति खंडित किए जाने के बाद, उसे नर्मदा नदी में विसर्जित किया गया। इसके बाद वर्ष 1968 में ग्राम बरखेड़ा के अवस्थी परिवार (श्रीमती द्रौपदी मातादीन अवस्थी) द्वारा माँ दुर्गा की नई प्रतिमा की स्थापना कराई गई। वर्तमान में मंदिर के मुख्य गर्भगृह में अष्टभुजाधारी माँ सिंहवाहिनी की नयनाभिराम और जाग्रत प्रतिमा सुशोभित है।
365 सीढ़ियाँ और भव्य मंदिर परिसर
सागौन के पेड़ों और हरियाली से घिरी इस पहाड़ी पर कभी आवागमन बेहद कठिन हुआ करता था और भक्तों को चढ़ाई में काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। लेकिन समय के साथ जनसहयोग और जीर्णोद्धार समिति के प्रयासों से तस्वीर बदल गई।
- संगमरमर की सीढ़ियाँ: भक्तों के दान और सहयोग से पहाड़ी पर ऊपर तक पहुँचने के लिए अब 365 संगमरमर की सीढ़ियाँ बनी हुई हैं।
- विशाल परिसर: मुख्य मंदिर के सामने ही ऊँचाई पर भगवान शिव का मंदिर और दाहिनी ओर एक अद्भुत गुफा है, जिसमें राम दरबार और पंचमुखी हनुमान जी की विशाल प्रतिमा विराजमान है।
- अन्य देवालय: परिसर में पूरा संगमरमर से निर्मित अनंतेश्वर मंदिर, यज्ञशाला और भैरव बाबा का दरबार भी स्थित है। इसके अलावा विभिन्न समाजों की धर्मशालाएँ यहाँ आने वाले यात्रियों के विश्राम के लिए उपलब्ध हैं।

संतान और समृद्धि की मन्नतें होती हैं पूरी
भक्तों का विश्वास है कि टिकीटोरिया वाली माता के दरबार में जो भी सच्चे मन से मुराद लेकर आता है, उसकी झोली कभी खाली नहीं होती। मान्यता है कि यहाँ संपत्ति के साथ-साथ संतान प्राप्ति की मनोकामना भी पूरी होती है। यहाँ आने वाले भक्त अक्सर कहते हैं कि “माता के दरबार में लोग रोते-रोते आते हैं और हँसते-हँसते जाते हैं।” पहाड़ी के ठीक नीचे बना ‘रामकुंड’ इस प्राकृतिक स्थल की सुंदरता में चार चाँद लगाता है।
अब और आसान होगा सफर: बुंदेलखंड का पहला रोप-वे
समय के साथ टिकीटोरिया धाम का कायाकल्प तेजी से हो रहा है। भक्तों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग द्वारा यहाँ बुंदेलखंड क्षेत्र का पहला रोप-वे लगाया जा रहा है, जिससे वृद्धों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं को पहाड़ी पर ऊपर तक पहुँचने में बेहद आसानी होगी।

कैसे पहुँचें टिकीटोरिया धाम?
सागर जिले की रहली तहसील के अंतर्गत जबलपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने के कारण इस सिद्ध क्षेत्र तक पहुँचना बेहद सुगम है:
- सड़क मार्ग द्वारा: सागर अथवा जबलपुर मुख्य शहर से आप अपनी निजी गाड़ी (कार/बाइक) या सार्वजनिक यात्री बसों के जरिए सीधे रहली और वहाँ से टिकीटोरिया तिराहे तक आसानी से पहुँच सकते हैं।
